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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:49 · नई दिल्ली संस्करण

भाजपा प्रत्याशी खंडेलवाल ने नवरात्र के नौ दिन के व्रत का लिया संकल्प

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन

नई

दिल्ली, । हिंदू नववर्ष 'विक्रम संवत 2081' मंगलवार से

शुरू हो चुका है। प्रत्येक साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष आरंभ

होता है। वर्ष प्रतिपदा हिंदू नववर्ष के पहले दिन प्रथम नवरात्र पर चांदनी

चौक से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लोकसभा उम्मीदवार प्रवीन खंडेलवाल ने

अपने घर पर सपरिवार मां दुर्गा का विधि-विधान से पूजन किया। खंडेलवाल ने

पूजन से पूर्व महाकाल की धरती उज्जैन के प्रसिद्ध वेद मर्मज्ञ आचार्य

दुर्गेश तारे से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मां दुर्गा के नौ दिन के

व्रत का संकल्प लिया।

खंडेलवाल ने आज अपने चुनाव-प्रचार

अभियान के बीच क़रोल बाग में स्थित मां झंडेवाली, कनाट प्लेस में प्राचीन

हनुमान मंदिर, बंगला साहिब, मां काली मंदिर, मंदिर मार्ग पर भगवान महर्षि

वाल्मीकी मंदिर, करोल बाग में संकटमोचन सिद्ध हनुमान मंदिर पर 108 फीट ऊंची

हनुमान प्रतिमा और श्रीगौरी शंकर मंदिर जाकर भगवान के दर्शन कर पूजन किया

एवं आशीर्वाद प्राप्त किया। भाजपा प्रत्याशी प्रवीण खंडेलवाल ने वर्ष

प्रतिपदा हिंदू नव वर्ष के पहले दिन कमला नगर में आयोजित एक कार्यक्रम में

भी भाग लिया।

खंडेलवाल ने कहा कि चैत्र नवरात्रि में मां

दुर्गा की पूजा विशेष फलदायी है। नवरात्रि ही ऐसा पवित्र पर्व है जिसमें

महाकाली, महालक्ष्मी और मां सरस्वती की साधना कर मनचाही

सिद्धियां-उपलब्धियां हासिल की जा सकती है। इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत

के दौरान उन्होंने कहा कि नवरात्र वस्तुतः शक्ति उपासना का पर्व है। वर्ष

में दो बार आकर यह सृष्टि के कण-कण में शक्ति का एहसास कराता है। उन्होंने

कहा कि न केवल यह जगत वरन संपूर्ण ब्रह्मांड शक्ति से संचालित है। यह पर्व

सात्विक आहार-विहार का पालन करते हुए शक्ति स्वरूपा मां की उपासना कर हर

व्यक्ति को शक्ति अर्जित करने का शुभ अवसर प्रदान करता है। आसुरी एवं तामसी

शक्तियों पर विजय प्राप्त करने वाली मां के विविध रूप तामसी व्रतियों से

दूर रहने का संदेश देते हैं। इसलिए, दुर्व्यसनों से मुक्ति इस पर्व का महान

संदेश है।

खंडेलवाल ने कहा कि नवरात्र उपासना में घट

स्थापन तथा जौ बोने का विशेष महत्व है। घट इस शरीर का प्रतीक है। शुद्ध जल

और पत्र पुष्पों से युक्त घट के शरीर में जल तत्व की महत्ता और प्राकृतिक

पर्यावरण को शुद्ध रखने का संदेश देता है। जौ बोना जहां हरित पर्यावरण का

प्रतीक है, वहीं 'जो बोओगे वही काटोगे' का संदेश देकर मनुष्य को सत्य

कर्मों की ओर प्रेरित करता है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख

करते हुए खंडेलवाल ने कहा कि नवरात्र नारी महिमा और सम्मान का पर्व भी है।

आसुरी शक्तियों का विनाश करने वाले दुर्गा के विविध रूप याद दिलाते हैं कि

नारी अबला नहीं है। वह चाहे तो चंडी और काली बनकर जुल्म करने वाले

महिषासुरो का स्वयं संहार कर सकती है। जहां विभिन्न मांगलिक अवसरों पर

कन्या पूजन की परंपरा हो, वहां कन्या भ्रूण हत्याएं शोभा नहीं देती। अतः

सच्चे अर्थों में शक्ति स्वरूपा नारी सम्मान को प्रतिष्ठापित करना ही

नवरात्र महोत्सव का मंगल संदेश है।

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