गुलाब-खुशबू वाली लीची की पहली खेप पठानकोट से क़तर रवाना — भारत के कृषि निर्यात को नई ऊंचाई
नई दिल्ली / पठानकोट।
भारत के ताजे फलों के वैश्विक वाणिज्य में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए, पंजाब के पठानकोट से गुलाब की खुशबू वाली प्रीमियम लीची की पहली खेप क़तर (दोहा) के लिए रवाना की गई। इस पहल के अंतर्गत 1 मीट्रिक टन लीची क़तर और 0.5 मीट्रिक टन लीची दुबई को भी भेजी गई — जो कि एक दोहरी निर्यात सफलता है।
इस ऐतिहासिक अवसर को संभव बनाया गया भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत
APEDA (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority)
द्वारा, जो पंजाब सरकार के बागवानी विभाग, लुलु ग्रुप इंटरनेशनल, और प्रगतिशील किसान श्री प्रभात सिंह के सहयोग से संचालित हुआ।
भारत की खेती से खाड़ी देशों तक — एक खुशबूभरी यात्रा
पठानकोट की जलवायु, उपजाऊ मिट्टी और स्थानीय किसानों की मेहनत ने इस क्षेत्र को अब लीची निर्यात का नया हब बना दिया है।
श्री प्रभात सिंह, जो सुजानपुर के एक अग्रणी किसान हैं, ने उच्च गुणवत्ता की लीची का उत्पादन कर यह दिखा दिया है कि भारत के छोटे कस्बे भी अब वैश्विक कृषि मानचित्र पर प्रमुख स्थान प्राप्त कर सकते हैं।
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के आँकड़े (2023–24):
पंजाब का कुल लीची उत्पादन: 71,490 मीट्रिक टन
भारत में योगदान: 12.39%
कुल निर्यात: 639.53 मीट्रिक टन
कृषि क्षेत्र: 4,327 हेक्टेयर
औसत उपज: 16,523 किलोग्राम/हेक्टेयर
APEDA की भूमिका और सरकार की प्रतिबद्धता
यह पहल भारत सरकार के कृषि-निर्यात को बढ़ाने, किसानों को सशक्त करने और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की रणनीति का हिस्सा है।
APEDA ने FPOs, किसान उत्पादक संगठनों और निर्यातकों के साथ मिलकर एक ऐसा पारदर्शी और टिकाऊ इकोसिस्टम तैयार किया है, जो गुणवत्ता, ब्रांडिंग और वैश्विक मांग के अनुसार उत्पादन पर केंद्रित है।
भारत के फल निर्यात का बढ़ता प्रभाव
2024–25 (अप्रैल–मार्च) में फल एवं सब्जी निर्यात का मूल्य: $3.87 बिलियन
वृद्धि दर: 5.67%
प्रमुख फल निर्यात: आम, केला, अंगूर, संतरा
तेजी से उभरते फल: लीची, चेरी, जामुन
लीची की यह खेप केवल एक व्यापारिक लेनदेन नहीं, बल्कि भारत के किसानों की मेहनत, सरकार की दूरदृष्टि और वैश्विक बाज़ार में भारत की भरोसेमंद पहचान का प्रतीक है।





