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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:25 · नई दिल्ली संस्करण

बसंत पंचमी : बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ का तिलकोत्सव आज, जानें कब है विवाह और गौना

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बसंत पंचमी : बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ का तिलकोत्सव आज, जानें कब है विवाह और गौना

वाराणसी। माता सरस्वती की आराधना और बसंत के आगमन के इतर बसंत पंचमी काशिवासियों के लिए और भी ज्यादा मायने रखती है। इसी दिन काशी विश्वनाथ के मस्तक पर तिलक चढ़ाया जाता है और भगवान शिव-पार्वती के भव्य विवाह यानी महाशिवरात्रि की तैयारियां विधिवत शुरू हो जाती हैं।

यह परंपरा काशी की प्राचीन संस्कृति का जीवंत प्रतीक है, जहां तिलकोत्सव के बाद विवाह और गौना की रस्में धूमधाम और भक्ति भाव से निभाई जाती हैं। ऐसे में मंदिर परिसर में सजावट, धार्मिक अनुष्ठान और भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है।

काशी की परंपरा के अनुसार, वसंत पंचमी पर बाबा का तिलक लगाया जाता है, जिससे महाशिवरात्रि की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस दिन बाबा विश्वनाथ को विवाह के लिए तैयार किया जाता है।

विवाह महोत्सव महाशिवरात्रि पर मनाया जाता है, जबकि गौना (परिवहन या विदाई) रंगभरी एकादशी पर होता है। रंगभरी एकादशी पर भगवान शिव माता पार्वती को लेकर काशी लौटते हैं और होली की शुरुआत होती है। इस दिन मंदिरों में भगवान को अबीर-बुक्का चढ़ाकर शुरुआत की जाती है।

दृक पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि रविवार, 15 फरवरी को है। यह फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को पड़ती है। निशिता काल पूजा का समय मध्यरात्रि में होता है, जब भक्त रात्रि जागरण, व्रत और शिव पूजन करते हैं।

काशी में इस दिन बाबा विश्वनाथ का विवाह महोत्सव बड़े धूमधाम से होता है। शहर के छोटे-बड़े हर मंदिर सजे हुए और भक्तों के आगमन से गुलजार रहते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर के साथ ही गौरी केदारेश्वर मंदिर, अमरनाथ मंदिर, तिलभांडेश्वर मंदिर, लोलार्केश्वर मंदिर, महामृत्युंज्य महादेव मंदिर, बनखंडी महादेव मंदिर, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।

इसके बाद आती है रंगभरी एकादशी, जिसे अमलकी एकादशी भी कहा जाता है। यह 27 फरवरी दिन शुक्रवार को है।

फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी पर यह पर्व मनाया जाता है। काशी विश्वनाथ मंदिर में इस दिन भगवान शिव की अर्धांगिनी माता पार्वती का गौना होता है, जिसके बाद होली की शुरुआत मसान होली और रंगों से होती है। भक्त बड़ी संख्या में इसमें शामिल होते हैं। मान्यता है कि श्मशान में इसी दिन बाबा अपने गण के साथ होली खेलते हैं।

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