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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:18 · नई दिल्ली संस्करण

माथे पर चंद्र धारण कर सजे बाबा महाकाल, सोमवार के दिन भक्तों ने बड़ी संख्या में किए दर्शन

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
माथे पर चंद्र धारण कर सजे बाबा महाकाल, सोमवार के दिन भक्तों ने बड़ी संख्या में किए दर्शन

उज्जैन। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार को भक्तों की भारी भीड़ दर्शन करने के लिए पहुंच रही है।

सोमवार होने की वजह से सामान्य दिनों की तुलना में भक्त सुबह से बाबा के दर्शन के लिए लंबी लाइनों में लगे हैं। आज की भस्म आरती में भी बाबा के निराकार और साकार रूप के दर्शन कर भक्त का मन आनंद से भर गया और पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा।

विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर में भस्म आरती से पहले वीरभद्र से आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले गए और फिर बाबा को हरिओम जल चढ़ाया गया।

हरिओम जल कोटितीर्थ कुंड से लाया जाता है, जो मंदिर परिसर के भीतर ही बना है। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक किया गया और भांग और सूखे मेवे से महाकाल का शृंगार किया गया। बाबा के मस्तक पर बेलपत्र और चंद्र बाबा को धारण कराए गए त्रिपुर तिलक लगाया गया, वस्त्र उड़ाने के बाद भस्म आरती संपन्न हुई।

आज सोमवार होने के चलते बड़ी संख्या में भक्त बाबा महाकाल के दरबार में पहुंचे थे और भस्म आरती में बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। बता दें कि प्रतिदिन भस्म आरती के बाद बाबा का दिव्य शृंगार किया जाता है, जिसके दर्शन के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं।

अक्षय तृतीया के दिन बाबा का शृंगार शेषनाग के साथ किया गया था।

भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे विशेष आरती होती है। इस आरती में बाबा साकार और निराकार दोनों रूपों में भक्तों को दर्शन देते हैं। बाबा का निराकार रूप जन्म और मृत्यु के परे माना जाता है, लेकिन बाबा का साकार रूप सांसारिक होता है।

बाबा के ये दोनों रूप संसार के दो अलग-अलग पहलुओं को दिखाते हैं। गर्मियों के चलते भस्म आरती के नियमों में बदलाव कर दिए गए हैं।

अब भस्म आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग एक दिन पहले की जा सकेगी। पहले भक्त मंदिर के काउंटर पर पहुंच कर भस्म आरती की टिकट लेते थे, लेकिन अब एक दिन पहले सीमित शुल्क के साथ भस्म आरती की टिकट ली जा सकती हैं।

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