भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच पर असदुद्दीन ओवैसी का आक्रोश: "शहीदों के लहू के बाद यह खेल नहीं, अपमान है"

भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच पर असदुद्दीन ओवैसी का आक्रोश: "शहीदों के लहू के बाद यह खेल नहीं, अपमान है"
नई दिल्ली। एशिया कप 2025 के शेड्यूल की घोषणा के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले क्रिकेट मुकाबले को लेकर राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस मैच को लेकर संसद में तीखी आपत्ति जताई है और कहा है कि यह निर्णय शहीदों के बलिदान का खुला अपमान है।
लोकसभा में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर विशेष चर्चा के दौरान ओवैसी ने तीखे लहजे में पूछा “जब पाकिस्तान के जहाज हमारे आसमान में नहीं आ सकते, उनकी कश्ती हमारे पानी में नहीं आ सकती, व्यापार बंद है, तो फिर क्रिकेट कैसे खेला जा सकता है?” उन्होंने भावुक होकर कहा, “मेरा जमीर मुझे उस मैच को देखने की इजाजत नहीं देता। क्या सरकार में इतनी नैतिक शक्ति है कि वह उन 25 शहीदों के परिवारों से कह सके कि हमने बदला ले लिया, अब आप पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच देखें?”
गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक की नृशंस हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इसके जवाब में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और POK के अंदर नौ आतंकी शिविरों को ध्वस्त कर 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया था। सेना की यह साहसी कार्रवाई देशवासियों में रोष और पीड़ा के बीच उम्मीद की किरण बनकर सामने आई थी। लेकिन अब एशिया कप में भारत-पाकिस्तान मैच की घोषणा ने फिर से इस जख्म को हरा कर दिया है।
आम जनता में असंतोष
एशिया कप के कार्यक्रम के अनुसार, भारत और पाकिस्तान का मुकाबला 14 सितंबर को होना तय है। संभावना है कि दोनों टीमें सुपर फोर और फाइनल में भी आमने-सामने हो सकती हैं। लेकिन इस संभावित 'क्रिकेट डिप्लोमेसी' पर विपक्ष ने कड़ा ऐतराज जताया है। ओवैसी की टिप्पणी ने एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है—क्या हम अपने वीर शहीदों की याद को यूं ही भुला देंगे, सिर्फ क्रिकेट के नाम पर?
क्रिकेट या कूटनीतिक कमजोरी?
भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट केवल एक खेल नहीं रहा, यह दोनों देशों के संबंधों का प्रतीक माना जाता है। जब तक पाकिस्तान आतंक का समर्थन करता रहेगा और हमारे निर्दोष नागरिकों की जान लेता रहेगा, तब तक उसके साथ किसी भी प्रकार का खेल, विशेषकर क्रिकेट जैसे उच्च प्रोफ़ाइल मैच, केवल राष्ट्रीय सुरक्षा और जनभावनाओं की अवहेलना है।
अब यह सवाल हर भारतीय के मन में गूंज रहा है कि क्या कुछ घंटों के खेल के लिए हम मासूम भारतीयों के बलिदान को भूल जाएं? क्या यह मैच 'खेल भावना' का प्रतीक है या फिर हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान और शहीदों के सम्मान की कीमत पर आयोजित एक लज्जाजनक समझौता?
सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे पर जनभावनाओं का सम्मान करे और स्पष्ट संदेश दे कि जब तक सीमा पार से आतंक जारी है, तब तक भारत के मैदानों में 'मैत्री के छक्के' नहीं गूंज सकते।





