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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 9:36 · नई दिल्ली संस्करण

30 अप्रैल का पंचांग: नरसिंह जयंती के साथ लगेगा भद्रा का साया, रवि योग के भी शुभ संकेत

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
30 अप्रैल का पंचांग: नरसिंह जयंती के साथ लगेगा भद्रा का साया, रवि योग के भी शुभ संकेत

नई दिल्ली। हर दिन का अपना महत्व और शुभ मुहूर्त होता है। तिथि और मुहूर्त के हिसाब से हिंदू धर्म में शुभ कार्य की शुरुआत होती है। 30 अप्रैल का दिन बेहद खास है क्योंकि गुरुवार को नरसिंह जयंती और छिन्नमस्ता जयंती है।

गुरुवार के दिन तिथि चतुर्दशी है और रात 9 बजकर 12 मिनट के बाद पूर्णिमा लग जाएगी। गुरुवार को भद्रा और राहुकाल दोनों का साया रहेगा, तो चलिए जानते हैं कि आज कौन से शुभ और अशुभ मुहूर्त लगने वाले हैं।

गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन भगवान विष्णु को पीले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं और मनोकामना पूर्ति के लिए व्रत और अनुष्ठान भी किए जाते हैं।

दृक पंचांग के अनुसार गुरुवार को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 16 मिनट से लेकर 4 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 55 मिनट से लेकर 7 बजकर 15 मिनट तक रहेगा, जबकि वहीं अमृत काल शाम 7 बजकर 20 मिनट से लेकर 9 बजकर 04 मिनट तक रहेगा।

गुरुवार को रवि योग भी बन रहा है, जिसका समय सुबह 5 बजकर 42 मिनट से लेकर रात 2 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।

रवि योग का बनना बहुत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि रवि योग के समय सूर्य और चंद्रमा के नक्षत्रों की गणना बहुत सटीक होती है, और दोनों की स्थिति के आधार और गणना को देखते हुए अत्यंत शुभ योग बनता है। इस मुहूर्त में किए गए सारे काम सफल होते हैं और सुख-समृद्धि की बारिश होती है। इस समय दान का बहुत महत्व माना जाता है। कहा जाता है कि इस मुहूर्त में किया गया दान भगवान के चरणों में समर्पित रहता है।

अशुभ काल की बात करें तो 30 अप्रैल के दिन राहुकाल दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 9 बजकर 1 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 40 मिनट तक रहेगा, वहीं वर्ज्य सुबह 8 बजकर 56 मिनट से लेकर 10 बजकर 40 मिनट तक रहेगा।

वहीं यमगण्ड काल सुबह 5 बजकर 42 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 22 मिनट तक रहेगा और दुर्मुहूर्त सुबह 10 बजकर 7 मिनट से लेकर 10 बजे तक रहेगा। वहीं भद्रा रात 9 बजकर 12 बजे से लेकर अगली सुबह 5 बजकर 42 मिनट कर रहेगा।

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