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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:17 · नई दिल्ली संस्करण

महाकाल के दरबार में आस्था का रंग, भस्म आरती में हुआ दिव्य शृंगार; शाम को दूसरी सवारी

- नगर भ्रमण कर अपनी प्रजा का हाल जानेंगे अवंतिकानाथ

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन80 बार पढ़ा गया
महाकाल के दरबार में आस्था का रंग, भस्म आरती में हुआ दिव्य शृंगार; शाम को दूसरी सवारी

- नगर भ्रमण कर अपनी प्रजा का हाल जानेंगे अवंतिकानाथ

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के मंदिर में श्रावण मास में भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। आज श्रावण मास के दूसरे सोमवार प्रातः भस्म आरती में बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में दिव्य शृंगार किया गया। इस दौरान हजारों भक्तों ने दिव्य दर्शनों का लाभ प्राप्त किया। वहीं, शाम को बाबा महाकाल की श्रावण मास की दूसरी सवारी निकलेगी, जिसमें अवंतिकानाथ नगर भ्रमण कर अपनी प्रजा का हाल जानेंगे।

आज देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे हैं। भगवान महाकालेश्वर के दर्शन के लिए भक्तों की कतारें लगी हुई हैं। भस्म आरती के लिए मंदिर के कपाट तड़के 2:30 बजे खोले गए। इसके बाद शुरू दर्शन का सिलसिला रात 10 बजे होने वाली शयन आरती तक चलेगा। महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी महेश गुरु ने बताया कि श्रावण मास के दूसरे सोमवार पर मंदिर के पट तड़के 2:30 बजे खोले गए। परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीर बाल भद्र का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय और नंदी का विधि-विधान से अभिषेक और पूजन संपन्न हुआ। फिर कर्पूर आरती की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए प्रवेश दिया गया।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जल से भगवान महाकाल का अभिषेक करने के बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन किया गया। रजत चंद्र, त्रिशूल, मुकुट और आभूषणों के साथ भांग, चंदन और ड्रायफ्रूट का शृंगार कर भस्म चढ़ाई गई। फल और मिठाई का भोग लगाया गया। "जय श्री महाकाल" के जयघोष के बीच भस्म आरती संपन्न हुई। इसके बाद भगवान को रजत मुकुट, आभूषण और दिव्य वस्त्र धारण कराए गए। निराकार से साकार स्वरूप में भगवान महाकाल ने भक्तों को दर्शन दिए। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने चलित भस्म आरती के माध्यम से भी बाबा महाकाल के दर्शन किए।

परम्परा के मुताबिक, भगवान महाकाल की श्रावण-भादौ मास में निकलने वाली सवारियों के क्रम में आज शाम चार बजे सावन की दूसरी सवारी निकलेगी। सवारी के निकलने के पूर्व दोपहर करीब 3.30 बजे महाकालेश्ववर मंदिर परिसर के सभामंडप में बाबा महाकाल का षोड़षोपचार पूजन होगा। इसके बाद भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में पालकी में सवार होकर भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकलेंगे। पालकी जैसे ही मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचेगी, सशस्त्रल पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दी जाएगी।

इसके बाद मंदिर प्रांगण से सवारी प्रस्थान करेगी और करीब डेढ़ किलोमीटर दूरी तय कर शाम 5 बजे रामघाट पहुंचेगी, जहां पर शिप्रा से बाबा महाकाल का जलाभिषेक होगा। रामघाट पर पूजन और आरती के बाद बाबा महाकाल वापस मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे। सवारी शाम 7 बजे मंदिर पहुंचेगी। महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि बाबा महाकाल की सवारी में जनजातीय सांस्कृतिक दल प्रस्तुति देंगे।

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