अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए अब गधे को हथियार बनाने जा रहा पाकिस्तान, ऐसे कमाएगा पैसा!

विदेशी मुद्रा की कमी और आर्थिक दबाव से जूझ रहा पाकिस्तान अब गधों का कारोबार बढ़ा रहा है, जिसका सीधा संबंध चीन से है। बलूचिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के पास गधों के वध और प्रसंस्करण की सुविधा विकसित की जा रही है। यहां से गधे का मांस और खाल चीन भेजने की योजना है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस कारोबार का सबसे बड़ा आर्थिक आकर्षण गधे का मांस नहीं, बल्कि उसकी खाल बताई जा रही है। चीन में गधे की खाल से ‘एजियाओ’ नाम का पारंपरिक उत्पाद तैयार किया जाता है। इसके लिए खाल को संसाधित कर कोलेजन निकाला जाता है।
इसका इस्तेमाल पारंपरिक चीनी चिकित्सा और सौंदर्य उत्पादों में किया जाता है। चीन में एजियाओ का इस्तेमाल लंबे समय से कई स्वास्थ्य लाभों वाले पारंपरिक उत्पाद के रूप में किया जाता रहा है। खाल की इसी मांग ने गधे के कारोबार को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन में गधों की आबादी में गिरावट आने के बाद उसकी कंपनियां दूसरे देशों से गधों और उनकी खाल की आपूर्ति हासिल कर रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक दुनिया में हर साल लाखों गधों को उनकी खाल के लिए मारे जाने का अनुमान है। 2021 में चीन के एजियाओ बाजार का आकार करीब 7.8 अरब डॉलर आंका गया था।
अफ्रीका लंबे समय तक चीन के लिए गधे की खाल का प्रमुख स्रोत रहा, लेकिन 2024 में अफ्रीकी संघ ने गधों की खाल के लिए उनके वध और निर्यात पर महाद्वीप स्तर पर रोक का समर्थन किया। इसके बाद आपूर्ति के लिए पाकिस्तान समेत अन्य देशों का महत्व बढ़ा है। बता दें पाकिस्तान में गधों की आबादी 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक 60 लाख से ज्यादा बताई गई है। देश पहले भी चीन को गधे निर्यात करने की संभावनाएं तलाशता रहा है। पंजाब के ओकारा जिले में करीब 3,000 एकड़ में गधा प्रजनन फार्म विकसित करने की योजना भी सामने आई थी। इसका उद्देश्य गधों की कई नस्लों का प्रजनन कर घरेलू और विदेशी बाजारों के लिए आपूर्ति तैयार करना था।
ग्वादर में चीन से जुड़ी हैंगेंग ग्रुप ने गधे के वध और प्रसंस्करण की सुविधा तैयार की है। कंपनी ने पाकिस्तान में करीब 5 करोड़ डॉलर निवेश किया है और स्थानीय स्तर पर रोजगार देने की बात कही है। कंपनी अपनी क्षमता बढ़ाकर प्रतिदिन करीब 800 गधों के प्रसंस्करण तक पहुंचाने की योजना बना रही है। इसका मतलब यह नहीं है कि फिलहाल रोजाना 800 गधों का वध हो रहा है, बल्कि इतनी क्षमता विकसित करने की तैयारी है। यह कारोबार ऐसे समय में सामने आया है जब देश विदेशी मुद्रा, कर्ज और आयात भुगतान के दबाव से जूझ रहा है। वहीं पशु कल्याण और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़े सवाल भी अहम हैं, क्योंकि गधे पाकिस्तान में परिवहन और छोटे स्तर के कृषि कार्यों में इस्तेमाल होते हैं।





