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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:43 · नई दिल्ली संस्करण

सबरीमाला अयप्पा मीट में वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप, कांग्रेस ने मंत्री वासवन से जवाब मांगा

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
सबरीमाला अयप्पा मीट में वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप, कांग्रेस ने मंत्री वासवन से जवाब मांगा

तिरुवनंतपुरम। सबरीमाला से जुड़े ग्लोबल अयप्पा मीट के आयोजन में कथित वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला और तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने देवस्वोम मंत्री वी. एन. वासवन पर विधानसभा को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।

यह विवादित मीटिंग पिछले साल हुई थी और अब केरल हाईकोर्ट ने इसकी वित्तीय जवाबदेही पर भी कड़ी टिप्पणी की है। चेन्निथला ने आरोप लगाया कि अयप्पा मीट के नाम पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हुई है। उन्होंने घोषणा की कि वे मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस विधानसभा में पेश करेंगे, क्योंकि उन्हें कथित तौर पर गलत जानकारी दी गई।

विधानसभा का सत्र 23 फरवरी को फिर से शुरू होगा और उम्मीद है कि चेन्निथला उसी सत्र के दौरान नोटिस पेश करेंगे।

चेन्निथला ने कहा कि मंत्री ने बताया था कि इवेंट से जुड़े फंड देवस्वोम बोर्ड को दिए गए थे, लेकिन पूरी राशि ट्रांसफर नहीं हुई।

उन्होंने सवाल उठाया, “सरकार ने कोर्ट में कहा कि यह इवेंट सरकारी खर्च पर नहीं होगा, लेकिन असेंबली में अलग बात पेश की गई। असेंबली और हाईकोर्ट में अलग आंकड़े क्यों हैं?” उन्होंने सरकार और देवस्वोम बोर्ड से पूरी सफाई मांगी।

राधाकृष्णन ने भी यही आरोप दोहराए और कहा कि यह इवेंट सरकार के लिए लायबिलिटी बन गया है। उन्होंने कहा कि असेंबली का रिकॉर्ड भरोसेमंद माना जाता है और सवाल किया कि सदन में सही जानकारी क्यों नहीं दी गई।

उन्होंने पूछा, "असेंबली और हाईकोर्ट के सामने दो अलग-अलग बातें क्यों पेश की गईं?" उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार और देवस्वोम बोर्ड इस अंतर को स्पष्ट करें।

चेन्निथला ने इवेंट के संचालन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आयोजन की जिम्मेदारी कैसे बांटी गई और क्या खर्च के दावों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे प्रोग्राम के भी बिल बनाए गए जो वास्तव में हुए ही नहीं थे और लॉजिस्टिक्स व भुगतान में बताई गई गड़बड़ियों पर भी स्पष्टता मांगी।

दोनों नेताओं ने कहा कि अयप्पा मीट के खाते और खर्च की पूरी डिटेल जनता के लिए उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा, "नागरिकों को सच जानने का अधिकार है। उन्होंने देवस्वोम मंत्री से साफ जवाब मांगा कि क्या इवेंट के फाइनेंस को संभालने को लेकर मंत्री और देवस्वोम बोर्ड के बीच कोई मतभेद है।

इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए टीडीबी के पूर्व अध्यक्ष पी.एस. प्रशांत (जिनके कार्यकाल में यह इवेंट हुआ था) ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कहा कि अयप्पा मीट के आयोजन और खर्चों के बारे में गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की जा रही है।

प्रशांत ने बताया, "अभी तक इवेंट पर कुल 3 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। यह पूरी रकम स्पॉन्सरशिप से मिली है, जिसमें से 1 करोड़ रुपए अतिरिक्त स्पॉन्सरशिप के रूप में प्राप्त हुए।

साथ ही, उन्होंने लॉजिस्टिक्स और भुगतान में हुई गड़बड़ियों पर स्पष्टता मांगी। दोनों नेताओं ने कहा कि अयप्पा मीट के खाते और खर्च की पूरी डिटेल जनता के लिए उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, "नागरिकों को सच जानने का अधिकार है और देवस्वोम मंत्री से यह भी पूछा कि क्या इवेंट के फाइनेंस को संभालने में मंत्री और देवस्वोम बोर्ड के बीच कोई मतभेद है।

इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए टीडीबी के पूर्व अध्यक्ष पी.एस. प्रशांत ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कहा कि अयप्पा मीट के आयोजन और खर्चों के बारे में गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की जा रही है।

प्रशांत ने बताया, "अभी तक इवेंट पर कुल 3 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यह पूरी राशि स्पॉन्सरशिप से मिली है, जिसमें से 1 करोड़ रुपये अतिरिक्त स्पॉन्सरशिप के रूप में प्राप्त हुए।"

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