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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 9:36 · नई दिल्ली संस्करण

17 दिन के ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन के बाद भारत लौटेंगे एस्ट्रोनॉट शुभांशु, कहा – "भारत आज भी सारे जहां से अच्छा है"

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
17 दिन के ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन के बाद भारत लौटेंगे एस्ट्रोनॉट शुभांशु, कहा – "भारत आज भी सारे जहां से अच्छा है"

17 दिन के ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन के बाद भारत लौटेंगे एस्ट्रोनॉट शुभांशु, कहा – "भारत आज भी सारे जहां से अच्छा है"

नई दिल्ली, 13 जुलाई 2025 : भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारत के एस्ट्रोनॉट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला आज, 14 जुलाई को 17 दिन के ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन के बाद धरती पर लौटने वाले हैं। वे भारत के दूसरे और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहुंचने वाले पहले भारतीय नागरिक बने हैं। उनका यह मिशन, अमेरिका की निजी अंतरिक्ष कंपनी Axiom Space द्वारा आयोजित Axiom-4 मिशन का हिस्सा था, जो 25 जून 2025 को लॉन्च हुआ था।

मिशन के दौरान शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोगों में भाग लिया, जिनमें हड्डियों की संरचना, विकिरण प्रभाव, पौधों की खेती, और स्पेस बायोलॉजी शामिल हैं। उन्होंने अंतरिक्ष में मेथी और मूंग की खेती कर भारतीय अंतरिक्ष कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग को अंजाम दिया। इस मिशन का उद्देश्य न केवल वैज्ञानिक शोध को आगे बढ़ाना था, बल्कि ISRO के आगामी "गगनयान" मिशन के लिए भी व्यवहारिक और तकनीकी अनुभव जुटाना था।

अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर 13 जुलाई को उनके लिए एक भावभीना फेयरवेल समारोह आयोजित किया गया, जहाँ उन्होंने भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा के ऐतिहासिक शब्दों को दोहराया —

"भारत आज भी सारे जहां से अच्छा है।"

शुभांशु ने इस मिशन को "अविश्वसनीय और जादुई यात्रा" बताया, और कहा कि यह अनुभव भारत के युवा वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। NASA के अनुसार, Axiom-4 क्रू की स्पेस स्टेशन से अलगाव प्रक्रिया आज शाम 4:30 बजे (IST) शुरू होगी और 15 जुलाई को दोपहर 3 बजे के आसपास अटलांटिक महासागर में स्प्लैशडाउन की संभावना है।

लखनऊ निवासी शुभांशु के माता-पिता भी उनके लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया को बताया कि बेटा जैसे ही लौटेगा, उसे उसका पसंदीदा घरेलू खाना खिलाएंगे — दाल, चावल, और आलू की सब्जी।

यह मिशन भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक नया मील का पत्थर साबित हो रहा है। यह दिखाता है कि भारत अब केवल उपग्रह प्रक्षेपण की शक्ति नहीं है, बल्कि मानव अंतरिक्ष यान मिशनों में भी विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है।

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