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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 9:36 · नई दिल्ली संस्करण

भांग से शृंगार, मस्तक पर सूर्य... बाबा महाकाल के अलौकिक दर्शन के लिए उमड़ा भक्तों का सैलाब

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
भांग से शृंगार, मस्तक पर सूर्य... बाबा महाकाल के अलौकिक दर्शन के लिए उमड़ा भक्तों का सैलाब

उज्जैन। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ माह कृष्ण पक्ष की दशमी पर विशेष भस्म आरती हुई। भांग से बाबा महाकाल का शृंगार हुआ। माथे पर सूर्य दमका। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचे। रात से ही भक्त कतारबद्ध थे, ताकि वे इस दिव्य क्षण का हिस्सा बन सकें।

भस्म आरती के लिए सुबह करीब 4 बजे मंदिर के पट खुले। कपाट खुलते ही पूरे परिसर में 'जय श्री महाकाल' के जयकारे गूंज उठे। आज सोमवार होने के कारण श्रद्धालुओं की भीड़ और भी अधिक रही। देश के कोने - कोने से आए भक्तों ने भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। पूरा मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गूंजता रहा। हर ओर भक्ति और आस्था का माहौल था।

महाकालेश्वर मंदिर में पूरे दिन ही भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है, लेकिन सुबह है कि भस्म आरती में भक्तों का खासा उत्साह देखने को मिलता है। मान्यता है कि भस्म आरती के समय बाबा महाकाल स्वयं अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए जागते हैं। आज भी ऐसा ही दृश्य देखने को मिला जब पुजारियों ने विधि-विधान से बाबा का अलौकिक शृंगार किया और फिर भस्म अर्पित की गई। आज के दिन बाबा महाकाल का भांग से शृंगार हुआ। मस्तक पर सूर्य सजा। फिर बाबा महाकाल ने भस्म रमाई और मुंड माला पहनी।

उनके इस रूप को देखकर भक्त मंत्रमुग्ध हो गए।

भस्म आरती को महाकाल मंदिर की सबसे अनोखी और पवित्र आरती माना जाता है। इसमें बाबा महाकाल के साकार और निराकार दोनों रूपों के दर्शन होते हैं। भक्तों का मानना है कि बाबा का निराकार स्वरूप जन्म और मृत्यु के चक्र से परे है, जबकि साकार रूप जीवन के सांसारिक पहलुओं का प्रतीक है। यही कारण है कि यह आरती केवल पूजा नहीं बल्कि जीवन-दर्शन का अनुभव मानी जाती है।

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