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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:37 · नई दिल्ली संस्करण

निर्जला एकादशी पर आस्था का महासंगम, त्रिवेणी संगम में हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई पवित्र डुबकी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
निर्जला एकादशी पर आस्था का महासंगम, त्रिवेणी संगम में हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई पवित्र डुबकी

प्रयागराज/हरिद्वार। निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर गुरुवार को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित त्रिवेणी संगम में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह से ही हजारों श्रद्धालु संगम तट पर पहुंचे और गंगा, यमुना तथा अदृश्य सरस्वती के संगम में पवित्र स्नान कर भगवान से सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली और विश्व शांति की कामना की।

संगम में स्नान करने पहुंचे एक श्रद्धालु ने बताया, "आज निर्जला एकादशी का पवित्र पर्व है। हम त्रिवेणी संगम में स्नान करने आए हैं। स्नान के बाद पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान भी किए हैं। यह दिन बेहद पुण्यदायी माना जाता है।"

निर्जला एकादशी, जिसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है।

इस अवसर पर श्रद्धालु बिना जल और अन्न ग्रहण किए व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं।

प्रयागराज में इस पर्व को लेकर विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिला। मंदिरों और घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरे क्षेत्र में भक्ति का माहौल बना रहा।

वहीं, इस पर्व के महत्व पर जानकारी देते हुए पुरोहित गोपाल दास जी महाराज ने कहा, "आज भीमसेनी एकादशी यानी निर्जला एकादशी है।

ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से पूरे वर्ष की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।"

उधर, हरिद्वार में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि महाभारत के अनुसार महर्षि वेदव्यास ने भीम को निर्जला एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त माह होने के कारण सामान्य 24 के बजाय 26 एकादशियां पड़ रही हैं।

महंत रवींद्र पुरी ने श्रद्धालुओं से पवित्र नदी में या घर पर स्नान कर भगवान नारायण का ध्यान, पूजा और जप करने का आह्वान किया।

धार्मिक मान्यता है कि भगवान नारायण का निवास जल में माना जाता है, इसलिए इस दिन जल और स्नान का विशेष महत्व है।

एएसपी अनुष्का बडोला ने कहा, "शाम की गंगा आरती तक सुरक्षा व्यवस्था बनी रहेगी। ड्यूटी पर तैनात सभी कर्मचारी मौजूद हैं और हालांकि श्रद्धालुओं का लगातार आना-जाना जारी है, फिर भी भीड़ अभी नियंत्रण में है।"

एक श्रद्धालु ने कहा, "आज एकादशी का पवित्र स्नान का दिन है। माना जाता है कि एकादशी के दिन फल, पानी, पंखे और अन्य उपयोगी चीज़ें दान करने से आध्यात्मिक पुण्य और आशीर्वाद मिलता है।"

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