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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:50 · नई दिल्ली संस्करण

शिव-गौरी उपासना का दिव्य पर्व, महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग, नोट कर लें भद्रा का समय

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
शिव-गौरी उपासना का दिव्य पर्व, महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग, नोट कर लें भद्रा का समय

नई दिल्ली। महाशिवरात्रि भगवान शिव के साथ ही माता पार्वती की उपासना का सबसे खास और दिव्य पर्व है। इसे सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि शिव चेतना को पूरी तरह जागृत करने वाली रात माना जाता है। इस रात शिव की पूजा बेहद फलदायी और सिद्ध मानी जाती है। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी रविवार को मनाई जाएगी।

यह पर्व फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर पड़ती है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन, आध्यात्मिक जागरण और श्रद्धा का प्रतीक है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा आदि चढ़ाते हैं और रात्रि जागरण करते हुए शिवमंत्रों का जाप करते हैं।

त्रयोदशी तिथि 14 फरवरी की शाम 5 बजकर 4 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी शुरू हो जाएगी। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का मुख्य दिन होगा, जहां चतुर्दशी तिथि पूरे दिन और रात प्रभावी रहेगी। दृक पंचांग के अनुसार रविवार को नक्षत्र उत्तराषाढ़ा शाम 7 बजकर 48 मिनट तक उसके बाद श्रवण लग जाएगा। योग व्यतीपात है, जो 16 फरवरी की देर रात 2 बजकर 47 मिनट तक है।

चंद्रमा मकर राशि में संचरण करेंगे। वहीं, सूर्योदय 7 बजे और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 11 मिनट पर होगा।

शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 17 मिनट से 6 बजकर 8 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक, अमृत काल दोपहर 12 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 41 मिनट तक है। महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी है, जो सुबह 7 बजे से शाम 7 बजकर 48 मिनट तक है। यह शुभ कार्यों के लिए उत्तम है।

अशुभ समय का विचार भी जरूरी है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, इनमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं। राहुकाल दोपहर 4 बजकर 47 मिनट से शाम 6 बजकर 11 मिनट तक, यमगण्ड दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से 1 बजकर 59 मिनट तक है। वहीं, गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 23 मिनट से 4 बजकर 47 मिनट तक है। महाशिवरात्रि पर भद्रा की छाया भी है, शाम 5 बजकर 4 मिनट से 16 फरवरी की सुबह 5 बजकर 23 मिनट तक रहेगा।

इस समय कोई नया या शुभ कार्य न करें।

महाशिवरात्रि की पूजा मुख्य रूप से रात्रि में होती है, खासकर निशिता काल (मध्यरात्रि) में जो सबसे शुभ माना जाता है। भक्त पूरे दिन उपवास रखकर शिव की भक्ति में लीन रहते हैं। इस पर्व पर काशी, उज्जैन, सोमनाथ समेत हर एक छोटे-बड़े शिव मंदिरों में जागरण होता है। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह नकारात्मकता से मुक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का उत्तम दिन भी माना जता है।

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