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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:40 · नई दिल्ली संस्करण

नक्सली जहां सरकार विरोधी शिक्षा देते थे, वहां खोले जाएंगे 22 स्कूल

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
नक्सली जहां सरकार विरोधी शिक्षा देते थे, वहां खोले जाएंगे 22 स्कूल

सुकमा, 07 अप्रैल (हि.स.)। बस्तर के सुदूर वनांचलों के जिन गांवों में कभी बच्चों को जनताना स्कूलों के जरिए माओवादी विचारधारा की शिक्षा दी जाती थी, वहां अब भारतीय संविधान और औपचारिक शिक्षा की गूंज सुनाई दे रही है। वहीं सुकमा जिले के कोंटा ब्लॉक में शिक्षा विभाग ने 22 नए स्कूल खोलने का प्रस्ताव भेजा है। यह उन बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जिन्होंने अब तक स्कूल की दहलीज नहीं देखी है।गाैरतलब है कि बीजापुर और सुकमा जिले के कई नक्सल प्रभावित गांव वर्षों तक पहुंच से बाहर रहे, यहां शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ठप हाे गई थी। हालात ऐसे हैं कि कई गांवों में 10 साल तक के बच्चों को अब नर्सरी में दाखिला देना पड़ेगा, क्योंकि उन्होंने कभी स्कूल देखा ही नहीं। कोंटा ब्लॉक की स्थिति सबसे ज्यादा खराब रही है। हिड़मा के गांव पूवर्ती में सीआरपीएफ द्वारा गुरुकुल शुरू किए जाने के बाद बदलाव की शुरुआत हुई। करीब 20 साल बाद यहां बच्चों को पहली बार बताया गया कि स्कूल क्या होता है, ब्लैकबोर्ड कैसे काम करता है, और पढ़ाई कैसे की जाती है। आज पूवर्ती गुरुकुल में 30 बच्चे पढ़ रहे हैं, जबकि शिक्षा विभाग के स्कूल में भी 20 से अधिक बच्चों ने प्रवेश लिया है। टेकलागुड़ा सहित अन्य गांवों में भी कैंप खुलने के बाद स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की गई हैं।इस बदलाव की बयार अब नक्सलियों के मिलिट्री दलम के कमांडर रहे आत्मसमर्पित नक्सली बारसा देवा के गांव तक पहुंच रही है। सुकमा जिले के ओयोपारा जैसे गांव, जहां अब तक केवल जनताना स्कूल संचालित होते थे, वहां शिक्षा विभाग की टीम बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार संपर्क कर रही है। इस गांव में देवा के बेटे और भाई को छोड़कर कोई भी बच्चा स्कूल नहीं गया था। अब देवा का बेटा 12वीं की परीक्षा दे चुका है और बाकी बच्चों को भी स्कूल से जोड़ने की तैयारी है।बदलते बस्तर की सबसे बड़ी तस्वीर यह है कि पूर्व नक्सली बारसा देवा का भाई बुधरा बारसा अब सिलगेर में अतिथि शिक्षक बनकर बच्चों को पढ़ा रहा है। वह स्वयं गांव में शिक्षा की अलख जगा रहा है। बुधरा का कहना है कि भाई के आत्मसमर्पण के बाद हालात बदले हैं और अब वे ओयोपारा में भी स्कूल खोलने की मांग कर रहे हैं। पहले जनताना स्कूलों में बच्चों को माओवादी विचारधारा, और पार्टी के दस्तावेज पढ़ाए जाते थे। अब इनकी जगह लोकतंत्र, संविधान और सामान्य शिक्षा ले रही है।जिला शिक्षा अधिकारी जीआर मंडावी ने बताया कि कोंटा ब्लॉक में 22 नए स्कूलों का प्रस्ताव भेजा गया है, जरूरत के अनुसार आगे भी स्कूल खोले जाएंगे। बस्तर अब बंदूक से किताब की ओर बढ़ रहा है, जहां शिक्षा भविष्य की नई राह तय कर रही है।

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