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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:26 · नई दिल्ली संस्करण

अंबिकापुर: अवैध रेत खनन पर नहीं लग रही लगाम, प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
अंबिकापुर: अवैध रेत खनन पर नहीं लग रही लगाम, प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल

अम्बिकापुर। प्राकृतिक पर्यावरण और संसाधनों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीजी ) द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बावजूद सरगुजा जिले के सीतापुर नगर समेत आसपास के क्षेत्रों में रेत का अवैध कारोबार बेखौफ जारी है। खनिज विभाग की कथित अनदेखी और मिलीभगत के चलते रेत माफिया मांड नदी से बड़े पैमाने पर अवैध खनन और परिवहन कर रहे हैं। दिनदहाड़े हो रही इस तस्कर गतिविधि से जहां शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं प्रशासन की चुप्पी पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि एनजीटी ने पर्यावरण सुरक्षा के मद्देनजर 10 जून से 15 अक्टूबर तक नदियों और नालों से रेत खनन व परिवहन पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। इसके बावजूद, क्षेत्र की जीवनदायिनी मांड नदी से नियमों को ताक पर रखकर अवैध खनन किया जा रहा है। कार्रवाई से बचने के लिए माफियाओं ने बड़ी गाड़ियों की जगह ट्रैक्टरों का नेटवर्क तैयार किया है। रायकेरा, टोकोपारा, मंगरेलगढ़, नवाटोली, केसला और ढेलसरा जैसे ग्रामीण इलाकों से गुजरने वाली मांड नदी के विभिन्न घाटों को माफियाओं ने आपस में बांट लिया है।

अवैध खनन की रफ्तार बढ़ाने के लिए माफियाओं ने ट्रैक्टर चालकों के लिए 'अधिक ट्रिप पर अधिक बोनस' का लालच दिया है। इस होड़ के कारण तड़के सुबह से ही तेज रफ्तार ट्रैक्टर सड़कों पर दौड़ने लगते हैं। विशेषकर शहीद भगत सिंह चौक से केसला मांड नदी तक जाने वाला मार्ग अत्यंत संकरा है, जिससे हर समय जानलेवा दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। दिनभर ट्रैक्टरों के जरिए रेत को ग्राम सोनातराई स्थित अवैध डिपो में डंप किया जाता है और फिर रात के अंधेरे में हाइवा जैसे भारी वाहनों के माध्यम से इसे बाहरी क्षेत्रों में खपा दिया जाता है।

रेत के इस अनियंत्रित दोहन से प्राकृतिक पारिस्थितिकी को भारी नुकसान पहुंच रहा है। नगर पंचायत सीतापुर के वार्ड क्रमांक-7 (केसला) के निवासियों का कहना है कि लगातार खनन से नदी का प्राकृतिक प्रवाह बदल गया है और तटों का कटाव तेजी से बढ़ रहा है। नतीजतन, बारिश के मौसम में बाढ़ का पानी सीधे बस्तियों में घुसने लगता है। इसके अलावा, नदी के तल में बने गहरे और जानलेवा गड्ढे स्थानीय लोगों के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। ग्रामीणों ने कई बार उच्च अधिकारियों से शिकायत कर इस पर रोक लगाने की गुहार लगाई है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।

इस मामले में जब जिला खनिज अधिकारी अनिल कुमार साहू से बात की गई, तो उन्होंने जांच टीम भेजकर संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

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