BREAKING NEWS

भाजपा का सोशल इंजीनियरिंग कार्ड, जयपुर में 52 महिला-8 मुस्लिम उम्मीदवार

भाजपा का सोशल इंजीनियरिंग कार्ड, जयपुर में 52 महिला-8 मुस्लिम उम्मीदवार

जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनाव भले ही स्थानीय निकाय की सियासत माना जा रहा हो,लेकिन भाजपा के टिकट वितरण ने इसके राजनीतिक मायने बढ़ा दिए हैं। पार्टी ने प्रत्याशियों के चयन में महिला और मुस्लिम प्रतिनिधित्व को प्रमुखता देकर सामाजिक संतुलन साधने के साथ राजनीतिक विस्तार का संदेश देने की कोशिश की है। भाजपा की ओर से जारी 150 में से 145 प्रत्याशियों की सूची में 52 महिला और 8 मुस्लिम चेहरों को जगह दी गई है।

भाजपा के इस टिकट वितरण को पार्टी की व्यापक सामाजिक पहुंच बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। खासतौर पर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों के साथ सामान्य वार्डों में भी मुस्लिम चेहरों को मौका देकर भाजपा ने अपने राजनीतिक दायरे के विस्तार का संकेत दिया है। वहीं महिला प्रत्याशियों की संख्या के जरिए पार्टी ने महिला नेतृत्व को चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बनाया है।

वहीं सबसे ज्यादा चर्चा मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र की है। यहां पूर्व डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावट और कुलदीप मिश्रा के नाम को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। सूची में पुनीत कर्णावट का नाम आने के बावजूद विधायक कालीचरण सराफ की ओर से कुलदीप मिश्रा को सिंबल दिए जाने की बात सामने आई है। अब प्रदेश नेतृत्व मामले को सुलझाने में जुटा है।

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा कि पार्टी ने मजबूत, जिताऊ और टिकाऊ उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। प्रत्याशियों के चयन को लेकर सभी स्तरों पर विचार-विमर्श किया गया और सहमति से निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि शेष पांच नामों को लेकर कोई विवाद नहीं है और पार्टी जल्द ही बाकी प्रत्याशियों की घोषणा करेगी।

वहीं भाजपा ने जारी 145 नामों में 8 मुस्लिम चेहरों को टिकट दिया है। इनमें वार्ड 19 से शहनवाज अंसारी, वार्ड 109 से जाकिर खान कायमखानी, वार्ड 113 से फरीदुद्दीन जैकी, वार्ड 117 से शब्बो जहां, वार्ड 128 से माजिद पठान, वार्ड 136 से मिजाना मिर्जा, वार्ड 137 से रहीस मंसूरी और वार्ड 146 से अफसाना शामिल हैं।

इनमें वार्ड 19 जैसी सामान्य सीट से शहनवाज अंसारी को टिकट दिए जाने की सबसे ज्यादा चर्चा है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा कि पार्टी सभी वर्गों और विचारों को साथ लेकर आगे बढ़ने में विश्वास रखती है। टिकट वितरण में भी इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखा गया है और ऐसे उम्मीदवारों को मौका दिया गया है, जिनकी अपने वार्ड में मजबूत पकड़ और जीतने की क्षमता है।

इधर भाजपा ने 145 घोषित सीटों में 52 महिलाओं को प्रत्याशी बनाया है। पार्टी के अनुसार यह संख्या करीब 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के दायरे से आगे है। महिला प्रत्याशियों को केवल आरक्षित सीटों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि कई सामान्य और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण वार्डों में भी महिला चेहरों पर भरोसा जताया गया है।

पार्टी की रणनीति में महिला मतदाता भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। स्थानीय निकाय चुनाव में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और परिवार स्तर पर उनके प्रभाव को देखते हुए भाजपा महिला प्रत्याशियों के जरिए महिला नेतृत्व और महिला सम्मान का राजनीतिक संदेश मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

गौरतलब है कि वार्ड 4 पिंकी देवी शर्मा, 6 स्नेहलता साबू, 7 पूजा, 8 सुमन अग्रवाल, 9 मंजू अग्रवाल, 10 पलक यादव, 20 डॉ. उदिता सिंह चौहान, 25 चंचल कंवर, 26 श्रवणी देवी, 32 श्वेता सुरोलिया, 33 सीमा यादव, 46 शिवकांता पांडे, 47 दीपा नाथावत, 56 रेखा सैनी, 58 सरोज वर्मा, 59 बबली वर्मा, 69 पूनम चोयल, 70 सुशीला देवी, 71 निशा गौड़, 72 गट्टू, 73 जयश्री गर्ग, 75 पूजा सन्मुखानी, 80 दलजीत कौर, 82 ममता यादव, 86 उषा टाटीवाल, 87 प्रतिभा शर्मा, 88 शशि कुमारी मिश्रा, 90 सरोज कंवर, 92 शीला शर्मा, 94 सुनीता मेहरा, 100 कविता शर्मा, 107 अनुराधा माहेश्वरी, 108 मीनाक्षी पारीक, 110 ज्योति खंडेलवाल, 116 लक्ष्मी देवी कोली, 123 पूनम मेहता, 124 मनभरी देवी, 125 लक्ष्मी देवी उज्जैनिया, 126 रीमा उमरवाल, 133 सीमा पारीक, 138 ममता, 139 रेनू खंडेलवाल, 142 मंजू महावर, 143 निधि सैनी, 145 वंदना जोशी, 148 मीनू सैनी, 149 सीनू पारीक और 150 शालू मीणा को टिकट दिया गया है। वार्ड 19 शहनवाज अंसारी, 117 शब्बो जहां, 136 मिजाना मिर्जा और 146 अफसाना मुस्लिम महिला प्रत्याशियों में शामिल हैं।

भाजपा के लिए टिकट वितरण के बाद अगली चुनौती इन प्रत्याशियों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की होगी। मुस्लिम प्रत्याशियों के जरिए अल्पसंख्यक इलाकों में पहुंच बढ़ाने और महिला चेहरों के जरिए महिला मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति कितनी सफल होगी, यह चुनाव परिणाम बताएंगे। फिलहाल भाजपा की सूची में महिला और मुस्लिम प्रतिनिधित्व को महज टिकट वितरण नहीं, बल्कि सामाजिक आधार विस्तार की चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

Subscribe Now