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SCO शिखर सम्मेलन में दिखी मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की तिकड़ी, अमेरिका और पाकिस्तान की बढ़ी चिंता

SCO शिखर सम्मेलन में दिखी मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की तिकड़ी, अमेरिका और पाकिस्तान की बढ़ी चिंता
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से पहले एक बार फिर वैश्विक कूटनीति का पारा चढ़ा गया। पीएम मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह अहम तिकड़ी दुनिया के बदलते समीकरणों की स्पष्ट तस्वीर पेश कर रही है। यह अमेरिका और पाकिस्तान के लिए जहां चिंता का सबब है, वहीं बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के उदय का प्रतीक भी है। 


एससीओ के 25 साल पूरे होने पर यह 26वां शिखर सम्मेलन बहुत खास है। पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग बिश्केक पहुंच गए हैं, जबकि पुतिन भी इस बैठक में शामिल होंगे। मोदी की पुतिन से द्विपक्षीय मुलाकात तय है, वहीं शी जिनपिंग से भी बातचीत की संभावना जताई जा रही है। साल 2001 में चीन, रूस और मध्य एशियाई देशों द्वारा स्थापित यह संगठन, जिसमें भारत और पाकिस्तान 2017 में, ईरान 2023 में और बेलारूस 2024 में पूर्ण सदस्य बने, अब वैश्विक जीडीपी के एक चौथाई और 3.4 अरब आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।


एससीओ का मुख्य एजेंडा आतंकवाद, क्षेत्रीय स्थिरता, सीमापार खतरे, यूरेशियन परिवहन गलियारे, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल परिवर्तन और व्यापार सुविधा पर केंद्रित है। भारत इस मंच पर आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुक्त क्षेत्र के लिए अपनी मजबूत बात रखेगा, जैसा कि पिछले साल भी किया गया था। भारत के लिए यह मंच मध्य एशिया से व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी बढ़ाने का एक अहम अवसर है। किर्गिस्तान की अध्यक्षता पाकिस्तान को सौंपी जाएगी और बिश्केक घोषणापत्र को अंतिम रूप दिया जाएगा। 


पुतिन और जिनपिंग अक्सर एससीओ को पश्चिमी प्रभाव के मुकाबले एक संयुक्त मोर्चा बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। अमेरिका लंबे समय से भारत को चीन के खिलाफ एक अहम साझेदार मानता रहा है, लेकिन जब मोदी, पुतिन और जिनपिंग एक मंच पर दिखते हैं, तो अमेरिका में यह बहस तेज हो जाती है कि भारत कहीं चीन-रूस खेमे की ओर तो नहीं खिसक रहा है। हालांकि, एससीओ कोई सैन्य गठबंधन नहीं है और इसमें सदस्य देशों के हित अक्सर टकराते रहते हैं, लेकिन यह समिट अमेरिका को याद दिलाती है कि यूरेशिया में वैकल्पिक शक्ति केंद्र मजबूत हो रहे हैं। बिश्केक में मोदी-पुतिन-शी की यह मुलाकात सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि 21वीं सदी की भू-राजनीति में शक्ति का केंद्र यूरेशिया की ओर खिसक रहा है।

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