केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। कर्मचारी खास तौर पर वेतन ढांचे, फिटमेंट फैक्टर और सालाना वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) से जुड़ी आयोग की सिफारिशों पर नज़र रखे हुए हैं। वेतन आयोग की टीम लगातार केंद्र और राज्य के कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके संगठनों के साथ बातचीत कर रही है। दिल्ली, लद्दाख, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई जगहों पर वेतन आयोग की टीम की बातचीत के बाद, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की मांगों का ब्योरा देने वाले ज्ञापन सामने आए हैं।
इनमें मुख्य मांगें हैं—सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव, फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी और सालाना इंक्रीमेंट रेट में बढ़ोतरी। 7वें वेतन आयोग के तहत, केंद्रीय कर्मचारियों को अभी 3% का सालाना इंक्रीमेंट मिलता है। कर्मचारी संगठन अब इस दर को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। NC-JCM, AIDEF और FNPO जैसे कर्मचारी संगठनों ने सालाना इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 6% करने का प्रस्ताव दिया है। वहीं, AINPSEF ने 7% सालाना इंक्रीमेंट की मांग की है और IRTSA ने 5% की मांग की है। इस तरह, अलग-अलग कर्मचारी यूनियनों की मांगें मौजूदा 3% इंक्रीमेंट रेट को 5% से 7% तक बढ़ाने की हैं।
लेकिन कर्मचारियों के लिए क्या ज़्यादा फ़ायदेमंद है—ज़्यादा फिटमेंट फैक्टर या सालाना इंक्रीमेंट में बढ़ोतरी? अगर सालाना इंक्रीमेंट मौजूदा 3% से बढ़कर 7% हो जाता है, तो इसका लंबे समय में काफ़ी असर पड़ सकता है। दिए गए हिसाब-किताब के अनुसार, अगर नौकरी के 30 साल बाकी हों, तो 7% सालाना इंक्रीमेंट से बेसिक पे लगभग ₹4.27 लाख तक पहुँच सकती है। वहीं, 2.57 गुना फिटमेंट फ़ैक्टर के आधार पर यह रकम लगभग ₹3.50 लाख होगी। ज़्यादा फिटमेंट फ़ैक्टर का असर सैलरी पर शुरुआत में ही दिखता है, क्योंकि यह मौजूदा बेसिक पे को नए सैलरी स्ट्रक्चर के हिसाब से एडजस्ट करता है। हालांकि, लंबे समय में सालाना इंक्रीमेंट बहुत अहम भूमिका निभाता है।
सालाना इंक्रीमेंट से कर्मचारी की बेसिक पे सीधे तौर पर बढ़ती है, जिसका मतलब है कि हर अगला इंक्रीमेंट पहले से बढ़ी हुई बेसिक पे पर लागू होता है। इससे समय के साथ कंपाउंडिंग जैसा असर होता है। खासकर उन कर्मचारियों के लिए जिनकी सर्विस के 15, 20 या 30 साल बाकी हैं, इंक्रीमेंट रेट में मामूली बदलाव भी लंबे समय में बहुत बड़ा अंतर ला सकता है। इसे एक काल्पनिक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए कि लेवल-10 के किसी केंद्रीय कर्मचारी की मौजूदा बेसिक पे ₹56,100 है। इसके आधार पर, 15 और 30 साल की अवधि के लिए अलग-अलग इंक्रीमेंट दरों का अनुमान लगाया जा सकता है।
अगर लगातार 7% सालाना इंक्रीमेंट मिलता है, तो 30 साल बाद बेसिक पे लगभग ₹4.27 लाख तक पहुँचने का अनुमान है। दूसरी ओर, 2.57x फिटमेंट फ़ैक्टर के आधार पर, शुरुआती एडजस्टमेंट के बाद 30 साल बाद बेसिक पे लगभग ₹3.50 लाख होगी। यह हिसाब बताता है कि लंबे समय तक नौकरी करने वाले कर्मचारी के लिए, लगातार ज़्यादा इंक्रीमेंट का असर काफ़ी बड़ा हो सकता है।
दिए गए अनुमानों के अनुसार, 30 साल की अवधि में, 7% की सालाना बढ़ोतरी से बेसिक पे लगभग ₹4.27 लाख तक पहुँच सकती है। यह 2.57x फिटमेंट फ़ैक्टर के तहत अनुमानित ₹3.50 लाख से ज़्यादा है। हालाँकि, सालाना बढ़ोतरी का फ़ायदा तुरंत नहीं मिलता; इसका मुख्य असर कई सालों बाद दिखता है। इसलिए, कर्मचारियों के लिए सिर्फ़ शुरुआती फिटमेंट फ़ैक्टर को देखने के बजाय, फिटमेंट फ़ैक्टर और सालाना बढ़ोतरी, दोनों का एक साथ आकलन करना ज़रूरी होगा।
अभी 8वें वेतन आयोग के लिए सालाना 5% से 7% तक की वेतन बढ़ोतरी (इंक्रीमेंट) की मांगें सामने आई हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक इनमें से किसी भी दर को मंज़ूरी नहीं दी है। इसी तरह, फिटमेंट फ़ैक्टर को लेकर भी अंतिम फ़ैसला अभी बाकी है। पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला 8वां वेतन आयोग अभी अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत कर रहा है। उम्मीद है कि आयोग मई-जून 2027 तक सरकार को अपनी सिफ़ारिशें और अंतिम रिपोर्ट सौंप देगा।
फिटमेंट फ़ैक्टर क्या होगा, सालाना वेतन बढ़ोतरी की दर क्या तय होगी और नया वेतन ढांचा कैसे लागू किया जाएगा - इन सवालों के जवाब 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफ़ारिशों और सरकार की मंज़ूरी के बाद ही साफ़ हो पाएंगे। फ़िलहाल, यह तय है कि जिन कर्मचारियों की सेवा के 15 से 30 साल बाकी हैं, उनके लिए सालाना वेतन बढ़ोतरी की दर में बदलाव का लंबे समय में बड़ा असर पड़ सकता है।