फतेहाबाद। रेवाड़ी में आयोजित मेघवाल सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा चमार जाति का नाम बदलकर मेघवाल करने की अनुशंसा करने के दिए गए आश्वासन के खिलाफ फतेहाबाद के चमार समाज ने कड़ा विरोध जताया है। सोमवार को संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास समिति के बैनर तले एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला उपायुक्त के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर इस घोषणा को तुरंत वापस लेने और किसी भी आगामी प्रशासनिक कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की है।
ज्ञापन सौंपने के बाद समिति के प्रधान भागीरथ नंबरदार ने कहा कि हरियाणा में चमार जाति कुल अनुसूचित जाति की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करती है। चमार समाज को अपने पूर्वजों से चली आ रही ऐतिहासिक वंशावली और अपनी पहचान पर गर्व है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समाज अपनी जाति का नाम बदलकर मेघवाल किसी भी सूरत में नहीं करना चाहता। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश में मेघवाल समाज के मात्र कुछ सौ परिवार ही रहते हैं। रेवाड़ी सम्मेलन में जिन चंद लोगों ने मुख्यमंत्री के सामने नाम बदलने की मांग रखी, वे संपूर्ण चमार समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करते और न ही उनके पास ऐसा प्रस्ताव रखने का कोई नैतिक अधिकार है। मुख्यमंत्री द्वारा बिना समाज की सहमति के आनन-फानन में की गई इस घोषणा से प्रदेश भर के चमार समाज में गहरा रोष व्याप्त है।
ज्ञापन में आगाह किया गया है कि हरियाणा में चमार समाज का सामाजिक और पारिवारिक ताना-बाना मेघवाल समाज से अलग है। दोनों समाजों में परस्पर वैवाहिक संबंध भी नहीं होते। ऐसे में यदि केंद्र या हरियाणा की भाजपा सरकार ने चमार समाज की भावनाओं और सामाजिक संरचना से खिलवाड़ करने की कोशिश की, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे। यदि सरकार ने अपनी अनुशंसा पर तुरंत रोक नहीं लगाई, तो भाजपा सरकार को प्रदेश स्तर पर उग्र विरोध का सामना करना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री की होगी। ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास समिति फतेहाबाद के प्रधान भागीरथ नंबरदार, उप प्रधान सतपाल चौहान, सचिव ओम प्रकाश, कैशियर अनिल इंदल, पूर्व प्रधान जगदीश सोलरा, सुखचैन सरपंच रत्ताखेड़ा, भूषण नूनिया, प्रेम, मंगत लाल लालवास, बलविन्दर चौहान सहित समाज के अनेक वरिष्ठ सदस्य व गणमान्य लोग उपस्थित रहे।





