बिहार में SIR यानी Special Intensive Revision के बाद वोटर लिस्ट से नाम काटने को लेकर सियासत तेज हो गई है। RJD नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर सबसे बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि 'सरनेम देखकर वोट काटे जा रहे हैं' और ये खेल बिहार से शुरू होकर पूरे देश में पहुंच गया है। तेजस्वी यादव मंगलवार रात दिल्ली पहुंचे थे। बुधवार 30 सितंबर को दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में INDIA ब्लॉक की अहम बैठक हुई, जिसमें SIR, EVM-VVPAT और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर चर्चा हुई। बैठक से पहले और बाद में तेजस्वी ने मीडिया से बात करते हुए चुनाव आयोग को जमकर घेरा।
तेजस्वी ने कहा, "वोट चोरी का तरीका बिहार से शुरू किया गया और बाद में इसे पूरे देश में लागू किया गया। चुनाव दर चुनाव बीजेपी को जिताने के लिए वोटों में हेराफेरी हो रही है।" उन्होंने दावा किया कि SIR के नाम पर गरीब, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वोटर्स के नाम काटे जा रहे हैं। सरनेम देखकर लिस्ट से नाम हटाया जा रहा है, जबकि बीजेपी समर्थकों के नाम जोड़े जा रहे हैं। तेजस्वी ने एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट का हवाला भी दिया। रिपोर्ट में कहा गया था कि पिछले 10 महीनों में दो चुनाव आयुक्तों - सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने चुनाव आयोग के कम से कम 14 फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई है।
तेजस्वी ने कहा, "जब दो चुनाव आयुक्त ही SIR पर सवाल उठा रहे हैं, तो समझ लीजिए लोकतंत्र कितने खतरे में है।" तेजस्वी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बीजेपी की 'कठपुतली' बताया। उन्होंने X पर पोस्ट कर लिखा था कि "चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार ने देश के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र किया है।" उन्होंने मांग की कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और उन्हें गिरफ्तार किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल में हुए चुनाव फर्जी हैं, वोट चोरी से सरकार बनी है, इसलिए दोनों राज्यों में दोबारा चुनाव बैलेट पेपर से कराया जाए। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है।
आयोग का कहना है कि SIR के सभी फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं और आंतरिक चर्चा सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे पहले भी जब तेजस्वी ने अपना नाम वोटर लिस्ट से कटने का दावा किया था, तो आयोग ने लिस्ट जारी कर बताया था कि उनका नाम 416 नंबर पर मौजूद है।बिहार में SIR के बाद 6,56,4075 वोटरों के नाम हटाए गए थे और 7.24 करोड़ वोटरों की ड्राफ्ट लिस्ट जारी हुई थी। अब यही मुद्दा बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सबसे बड़ा सियासी हथियार बन गया है।