उत्तर प्रदेश के मेरठ के सनसनीखेज नीला ड्रम हत्याकांड में आज कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। मेरठ जिला कोर्ट ने इस दिल दहला देने वाले मामले में मृतक सौरभ राजपूत की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फैसला सुनाया, दोनों आरोपी जेल से ही पेश हुए थे। कोर्ट परिसर में सुबह से ही भारी भीड़ और सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। फैसला आते ही मृतक के परिवार की आंखों में आंसू आ गए।
ये घटना 3 मार्च 2025 की है। मर्चेंट नेवी में काम करने वाले सौरभ राजपूत की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि उसकी पत्नी मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर पहले उसे नशीली दवा खिलाकर बेहोश किया, फिर चाकू से गोदकर मार डाला। हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए दोनों ने सौरभ के शव के 15 टुकड़े किए और उसे एक बड़े नीले प्लास्टिक के ड्रम में डालकर ऊपर से सीमेंट और रेत से भरकर सील कर दिया था। इसके बाद दोनों हिमाचल प्रदेश में शिमला-मनाली घूमने चले गए थे। मासूम बच्ची को नानी के घर छोड़ दिया गया था। पुलिस ने करीब 15 दिन बाद दोनों को गिरफ्तार किया था।
इस केस को फास्ट ट्रैक करने के लिए पुलिस ने महज 2 महीने में 1000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। केस 17 मार्च 2025 को कोर्ट में आया और जुलाई 2025 में जिला जज की कोर्ट में ट्रांसफर हो गया। सरकारी वकील कृष्ण कुमार चौबे ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों को पेश किया, जिसमें फॉरेंसिक एक्सपर्ट, पुलिस और सौरभ के परिवार के लोग शामिल थे। कोर्ट में इस केस की कुल 126 सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष ने सीमेंट, नीला ड्रम, चाकू, रेजर खरीदने के बिल, CCTV फुटेज और दोनों के शिमला-मनाली में साथ होने के वीडियो सबूत के तौर पर पेश किए थे। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि फैसले से पहले पिछले 4 दिनों से साहिल काफी चुप और गुमसुम था और दोनों ही पिछले तीन दिनों से जेल में लगातार प्रार्थना कर रहे थे।
फैसले के दौरान मृतक सौरभ के बड़े भाई राहुल राजपूत कोर्ट में मौजूद थे। उन्होंने कहा, "हमने शुरू से ही दोनों के लिए फांसी की मांग की है। 18 महीने से हमारा व्यापार ठप हो गया है, रोज कोर्ट के चक्कर काटते थे। जो उन्होंने मेरे भाई के साथ किया, वही उनके साथ होना चाहिए।" अभियोजन पक्ष ने दोनों आरोपियों के लिए फांसी की सजा की मांग की है, जबकि बचाव पक्ष का कहना था कि हत्या का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। अब कोर्ट दोषी करार दिए जाने के बाद सजा की मात्रा पर सुनवाई करेगा। अगर कोर्ट फांसी से कम सजा देता है तो परिवार ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाने की बात कही है।