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1 कचौरी-2 समोसा नहीं, DU की लड़कियों की हैं ये 10 बड़ी मांगें, सुनकर आप भी कहेंगे - बिल्कुल सही है!

1 कचौरी-2 समोसा नहीं, DU की लड़कियों की हैं ये 10 बड़ी मांगें, सुनकर आप भी कहेंगे - बिल्कुल सही है!
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में छात्रसंघ चुनाव का माहौल गरमाया हुआ है। कैंपस में "1 कचौरी-2 समोसा" जैसे फनी स्लोगन तो सुनने को मिल ही रहे हैं, लेकिन इन सबके बीच DU की छात्राओं ने अपनी असली मांगों की लिस्ट सामने रख दी है। ये मांगें सिर्फ कैंटीन के खाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सुरक्षा, समानता और सुविधाओं से जुड़ी हैं। आखिर क्या चाहती हैं DU की लड़कियां? आइए जानते हैं उनकी 10 बड़ी मांगें जो इस बार चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन गई हैं। छात्राओं की सबसे बड़ी मांग है कि लाइब्रेरी रात में भी खुली रहे। कई लड़कियां रात में पढ़ना चाहती हैं, लेकिन सुरक्षा के चलते उन्हें हॉस्टल लौटना पड़ता है। सेफ और महिला-फ्रेंडली 24 घंटे लाइब्रेरी चाहिए।



ज्यादातर कॉलेजों में गर्ल्स कॉमन रूम की हालत खराब है। न साफ सफाई है, न सैनिटरी पैड मशीन, न ही बैठने की ठीक सुविधा। छात्राएं चाहती हैं कि हर कॉलेज में हाइजीनिक और प्राइवेट कॉमन रूम बने। ये सबसे ज्यादा उठने वाली मांग है। हर कॉलेज के वॉशरूम में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन और फ्री पैड की सुविधा हो, ताकि पीरियड्स के दौरान कोई परेशानी न हो। शाम के बाद नॉर्थ कैंपस और साउथ कैंपस में अंधेरा हो जाता है। छात्राओं ने मांग की है कि पूरे कैंपस में CCTV, स्ट्रीट लाइट और महिला गार्ड्स की संख्या बढ़ाई जाए। DU के गर्ल्स हॉस्टल में शाम 7-8 बजे के बाद एंट्री बंद हो जाती है, जबकि लड़कों के हॉस्टल में कोई सख्ती नहीं है। लड़कियां इस भेदभाव को खत्म करने और कर्फ्यू टाइम बढ़ाने की मांग कर रही हैं।


"1 कचौरी-2 समोसा" स्लोगन यहीं से आया। कैंटीन में खाने की कीमतें ज्यादा हैं और क्वालिटी खराब है। छात्राएं सस्ता, साफ और हेल्दी खाना चाहती हैं। यौन उत्पीड़न की शिकायतों के लिए बनी ICC कई कॉलेजों में सिर्फ कागजों पर है। छात्राएं चाहती हैं कि ये कमेटी एक्टिव हो और शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई हो। कई कोर्स में लड़कियों को प्लेसमेंट के दौरान कम मौके मिलते हैं। छात्राएं चाहती हैं कि प्लेसमेंट सेल में बराबरी हो और करियर काउंसलिंग भी दी जाए। पढ़ाई, करियर और समाज के दबाव से कई छात्राएं डिप्रेशन में चली जाती हैं। हर कॉलेज में फ्री साइकोलॉजिकल काउंसलर की मांग जोर पकड़ रही है। जिम, स्पोर्ट्स ग्राउंड और एक्टिविटी क्लब में लड़कियों की भागीदारी कम है। छात्राएं चाहती हैं कि उन्हें भी बराबर की स्पोर्ट्स सुविधाएं और ट्रेनिंग मिले। इस बार DUSU चुनाव में ये 10 मांगें ही असली एजेंडा हैं। देखना होगा कि कौन सा छात्र संगठन इन मांगों को अपने मेनिफेस्टो में शामिल कर लड़कियों का भरोसा जीत पाता है।

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