कहने को तो ये शहर सपनों का शहर है, लेकिन कभी-कभी यहां से ऐसी खबरें आती हैं जो रूह कंपा देती हैं। मुंबई के नालासोपारा इलाके से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक परिवार ने अपने 32 साल के बेटे की मौत के 4 साल बाद तक उसकी लाश को घर में ही छुपाकर रखा। परिवार को उम्मीद थी कि एक दिन उनका बेटा फिर से जिंदा हो जाएगा। मामला नालासोपारा वेस्ट के संतोष भवन इलाके का है। 32 साल के युवक का नाम रोहित कुमार बताया जा रहा है। रोहित की मौत करीब 4 साल पहले 2022 में एक बीमारी के कारण हो गई थी। लेकिन परिवार ने उसकी मौत की खबर किसी को नहीं दी। न ही पुलिस को, न ही नगर पालिका को।
पुलिस की पूछताछ में जो बात सामने आई है वो और भी हैरान करने वाली है। परिवार एक बाबा के चक्कर में पड़ गया था। बाबा ने परिवार से कहा था कि रोहित मरा नहीं है, बल्कि गहरी नींद में चला गया है। तपस्या और पूजा-पाठ से वो एक दिन जरूर जाग जाएगा। बस इसी उम्मीद में परिवार पिछले 4 साल से लाश के साथ रह रहा था। घर के एक कमरे में रोहित के शव को बेड पर लिटाकर रखा गया था। रोजाना उसके लिए अगरबत्ती जलाई जाती थी, पूजा की जाती थी। परिवार के लोग उसी घर में खाना बना रहे थे, सो रहे थे। पड़ोसियों को भी इसकी भनक तक नहीं लगी क्योंकि परिवार ने सबसे मिलना-जुलना बंद कर दिया था। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब बिल्डिंग में रहने वाले लोगों ने बदबू की शिकायत की।
पहले लोगों को लगा कि कहीं चूहा मर गया होगा। लेकिन जब बदबू लगातार बढ़ती गई तो सोसाइटी के लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस जब घर में पहुंची तो उनके होश उड़ गए। कमरे के अंदर कंकाल में बदल चुका शव पड़ा था। घर में रोहित की मां, पिता और एक बहन रहते थे। तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।पुलिस अधिकारी ने बताया, "हमें घर से कई धार्मिक किताबें, भभूत और बाबा की तस्वीरें मिली हैं। परिवार मानसिक रूप से काफी परेशान लग रहा है। उन्होंने बताया कि उन्हें यकीन था कि रोहित जिंदा हो जाएगा।" फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। हालांकि 4 साल पुराना मामला होने के कारण पोस्टमार्टम से ज्यादा कुछ पता चलने की उम्मीद नहीं है।
पुलिस अब उस बाबा की तलाश कर रही है जिसने परिवार को इस अंधविश्वास में धकेला। इस घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। लोग सोचने पर मजबूर हैं कि आखिर कैसे एक पढ़ा-लिखा परिवार अंधविश्वास के चलते 4 साल तक एक लाश के साथ रह सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये सिर्फ अंधविश्वास नहीं, बल्कि गहरे सदमे और मानसिक बीमारी का भी मामला है। अपनों की मौत का गम कई बार लोगों को ऐसी दुनिया में ले जाता है जहां वो सच को स्वीकार ही नहीं कर पाते। फिलहाल परिवार काउंसलिंग के लिए भेजा गया है और पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।





