एक बार माता सीता को श्रीराम की लंबी आयु के लिए सिंदूर लगाते देख, हनुमान जी ने अपनी अटूट भक्ति में पूरे शरीर पर सिंदूर और उसे टिकाने के लिए चमेली का तेल लगा लिया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
हिंदू धर्म में देवी-देवताओं को उनकी पसंद की वस्तुएं अर्पित करने की परंपरा सदियों पुरानी है, जिससे उनकी कृपा और आशीर्वाद मिलता है। इसी कड़ी में बजरंगबली हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाना विशेष महत्व रखता है। यह परंपरा आज भी मंदिरों में पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है, जिसके पीछे एक पौराणिक कथा और अनेक शुभ फल जुड़े हैं।
इस परंपरा के पीछे एक रोचक कथा प्रचलित है। बताया जाता है कि एक बार माता सीता अपनी मांग में सिंदूर लगा रही थीं, यह देखकर हनुमान जी ने इसका कारण पूछा। माता सीता ने बताया कि वे ऐसा श्रीराम की लंबी आयु और सौभाग्य के लिए करती हैं। यह सुनकर श्री राम के प्रति अपनी अटूट भक्ति प्रदर्शित करने के लिए हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। चूंकि सिंदूर सूखा होता है और शरीर पर टिकाए रखने के लिए, हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर चमेली के तेल का लेप किया। तभी से, भक्तों द्वारा हनुमान जी को सिंदूर के साथ चमेली का तेल अर्पित करने की परंपरा आरंभ हो गई।
भक्तों का मानना है कि हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को यह तेल अर्पित करने से हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और बड़े से बड़े दोषों से मुक्ति मिलती है। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि किसी की कुंडली में कालसर्प दोष या शनि की साढ़ेसाती चल रही हो, तब इस उपाय से शांति मिलती है।
इसके अतिरिक्त, मंगल दोष से पीड़ित व्यक्ति यदि नियमित रूप से हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाते हैं, तब कुंडली में मंगल ग्रह मजबूत होता है और दोष का प्रभाव कम होता है। इस प्रकार, चमेली का तेल हनुमान जी की भक्ति और कृपा प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है, जो भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि लाता है और कष्टों का निवारण करता है।





