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जमशेदपुर में बाढ़ का खतरा, खतरे के निशान से ऊपर पहुंची खरकई

जमशेदपुर में बाढ़ का खतरा, खतरे के निशान से ऊपर पहुंची खरकई

पूर्वी सिंहभूम
 शहर और आसपास के इलाकों में रुक-रुक कर हो रही तेज बारिश के बीच बाढ़ का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है। शास्त्रीनगर, कदमा, बागबेड़ा नया बस्ती, बड़ौदा घाट, जुगसलाई और भुइयांडीह के निचले इलाकों में पानी घुसने की आशंका बनी हुई है।

वहीं, ओडिशा में हुई भारी बारिश के बाद ब्यांगबिल और खरकई डैम से पानी छोड़े जाने के कारण नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

सुवर्णरेखा भवन, आदित्यपुर स्थित फ्लड सेल की ओर से 31 अगस्त की सुबह आठ बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार खरकई नदी आदित्यपुर ब्रिज के पास खतरे के निशान को पार कर गयी है। नदी का जलस्तर 129.03 मीटर दर्ज किया गया, जबकि डेंजर लेवल 129 मीटर है। यानी खरकई नदी खतरे के निशान से 0.03 मीटर ऊपर बह रही है। लगातार बारिश और ऊपरी जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण नदी किनारे के इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

वहीं, मानगो ब्रिज के पास सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर 119.70 मीटर दर्ज किया गया है। यहां खतरे का निशान 121.50 मीटर निर्धारित है। फिलहाल सुवर्णरेखा नदी खतरे के निशान से नीचे बह रही है।

रिपोर्ट के अनुसार ओडिशा में 76 मिलीमीटर बारिश के बाद ब्यांगबिल डैम से 84.72 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। इसी तरह 72 मिलीमीटर बारिश के बाद खरकई डैम से 55.18 क्यूमेक्स पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। ऊपर से लगातार पानी आने के कारण खरकई नदी के जलस्तर पर दबाव बढ़ रहा है।

गांजिया बराज की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। सुबह आठ बजे यहां जलस्तर 135 मीटर दर्ज किया गया और इसमें बढ़ोतरी जारी है। दबाव को देखते हुए बराज के सभी आठ गेट खोल दिये गये हैं और करीब 1186.54 क्यूमेक्स पानी खरकई नदी में छोड़ा जा रहा है।

चांडिल डैम का जलस्तर सुबह आठ बजे 179.19 मीटर दर्ज किया गया। डैम के 13 रेडियल गेट और स्लुइस के माध्यम से नदी एवं नहर में कुल 744.57 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है।

दूसरी ओर गालूडीह बैराज के छह स्पिलवे गेट खोलकर सुवर्णरेखा नदी में 1633.36 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। बैराज से नहरों में पानी की आपूर्ति फिलहाल पूरी तरह बंद रखी गयी है।

लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन और राहत-बचाव दल को अलर्ट मोड में रखा गया है।

निचले इलाकों और नदी किनारे रहने वाले लोगों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। जलस्तर में और वृद्धि होने की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी रखी गयी है।

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