BREAKING NEWS

भीम आर्मी का टिहरी कूच हरिद्वार में रुका, शंकराचार्य चौक पर हंगामा

भीम आर्मी का टिहरी कूच हरिद्वार में रुका, शंकराचार्य चौक पर हंगामा


हरिद्वार। टिहरी के चर्चित केतन हत्याकांड को लेकर पीड़ित परिवार से मिलने टिहरी जा रहे भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं को मंगलवार को हरिद्वार में पुलिस ने रोक दिया। शंकराचार्य चौक पर भारी पुलिस बल, पैरामिलिट्री फोर्स और बैरिकेडिंग के बीच कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। स्थिति को देखते हुए हाईवे पर करीब एक घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही।

जानकारी के अनुसार, तीन दिन पहले भी नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद (रावण) और खानपुर विधायक उमेश कुमार को टिहरी कूच के दौरान इसी स्थान पर रोका गया था। आज भी बड़ी संख्या में भीम आर्मी कार्यकर्ता टिहरी जाने के लिए हरिद्वार पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी।

मौके पर एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर, एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह और एसपी देहात शेखर चंद सुयाल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। सुरक्षा के मद्देनजर हाईवे पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी तैनात की गईं। इसी दौरान सांसद चंद्रशेखर आजाद दूसरे मार्ग से आगे निकल गए, जबकि अधिकांश कार्यकर्ता टिहरी जाने की मांग पर अड़े रहे। बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वार्ता के लिए डामकोठी बुलाया, जिसके बाद बैरिकेड हटाकर यातायात बहाल कराया गया।

भीम आर्मी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि टिहरी में दलित युवक केतन लाल की निर्मम हत्या हुई है और उसका परिवार भय के माहौल में जी रहा है। उनका कहना है कि पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे नेताओं व कार्यकर्ताओं को प्रशासन का रोका जाना अनुचित है।

वहीं एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में टिहरी जा रहे लोगों को हरिद्वार में ही रोका गया। हालांकि, भीम आर्मी के प्रमुख नेताओं को आगे जाने की अनुमति दी गई।

क्या है केतन हत्याकांड?

बताया जा रहा है कि टिहरी के देवल गांव निवासी केतन लाल का एक युवती से प्रेम प्रसंग था। 7-8 जून की रात युवती के बुलाने पर वह अपने मित्र दिवाकर डिमरी के साथ खोलगढ़ गांव पहुंचा, जहां युवती के परिजनों ने दोनों को पकड़ लिया। आरोप है कि केतन और उसके मित्र के साथ मारपीट की गई, जिसमें केतन की मौत हो गई। इस मामले को लेकर पूरे प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का विरोध जारी है।

Subscribe Now