कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ-साथ राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी है। सोमवार सुबह दिल्ली से उन्होंने पार्टी छोड़ने की घोषणा की और आरजी कर अस्पताल की चर्चित घटना तथा भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई।
सुखेंदु शेखर राय ने दावा किया कि उन्होंने आरजी कर प्रकरण के बाद ही पार्टी छोड़ने का निर्णय ले लिया था, जिसे अब अमल में लाया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में बढ़ते भ्रष्टाचार तथा जनता के भीतर बढ़ते असंतोष ने तृणमूल के पतन को अपरिहार्य बना दिया था।
दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह भविष्य में सक्रिय राजनीति से भी संन्यास लेने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया था और ईमानदार नेताओं को हाशिये पर धकेल दिया गया था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि तृणमूल के सभी नेता भ्रष्ट नहीं हैं।
सुखेंदु शेखर ने पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की आय और संपत्ति की जांच की मांग भी की। आरजी कर मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आंतरिक जांच की मांग की थी, क्योंकि उन्हें अब भी लगता है कि सबूतों को नष्ट करने में उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार, उस घटना के बाद दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही थी और तभी उन्होंने तय कर लिया था कि वह अधिक समय तक पार्टी में नहीं रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि, सोमवार को ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक के लिए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के महासचिव व लाेकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी दिल्ली पहुंचे हुए हैं। बैठक से पहले सुखेंदु शेखर के इस्तीफे ने तृणमूल में नए राजनीतिक संकट की चर्चा तेज कर दी है।





