हरियाणा पुलिस ने तैयार किया 10,892 अपराधियों का डाटाबेस

हरियाणा पुलिस ने तैयार किया 10,892 अपराधियों का डाटाबेस
-रोहतक में सफल हुआ पायलट प्रोजेक्ट

चंडीगढ़। अपराध नियंत्रण और संगठित अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए हरियाणा पुलिस ने रोहतक, झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद जिलों में विशेष आरजेएसएफ (रोहतक-झज्जर-सोनीपत-फरीदाबाद) यूनिट का गठन किया है। यह यूनिट पिछले दस वर्षों में जघन्य अपराधों में शामिल अपराधियों का विस्तृत डाटाबेस तैयार कर उनकी गतिविधियों की निगरानी कर रही है।

यह जानकारी हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में दी गई। बैठक में पुलिस मुख्यालय की वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस आयुक्त, पुलिस अधीक्षक तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियो ने भाग लिया।

बैठक के दौरान रोहतक रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सिमरदीप सिंह ने बताया कि पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल के निर्देशानुसार इस यूनिट की शुरुआत सबसे पहले रोहतक जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई थी। अब इसे झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद जिलों में भी लागू किया गया। अब यह यूनिट चार जिलों में अपराध नियंत्रण और अपराधियों की निगरानी के लिए एक विशेष इंटेलिजेंस आधारित तंत्र के रूप में कार्य कर रही है। इसे भविष्य में अन्य जिलों में भी लागू करने की योजना है।

आरजेएसएफ यूनिट ने पिछले दस वर्षों के दौरान हत्या, हत्या के प्रयास तथा अन्य गंभीर अपराधों में शामिल 10,892 अपराधियों का विस्तृत डाटाबेस तैयार किया है। इस डाटाबेस में प्रत्येक अपराधी का आपराधिक इतिहास, गतिविधियां, संपर्क, सामाजिक पृष्ठभूमि तथा वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण सहित कई अन्य तथ्य शामिल किये गए हैं। यूनिट द्वारा इन अपराधियों का केवल रिकॉर्ड तैयार नहीं किया गया, बल्कि उन्हें विभिन्न श्रेणियों में बांटते हुए उनके जोखिम स्तर का भी आकलन किया गया है। इससे पुलिस को यह समझने में मदद मिल रही है कि कौन से अपराधी दोबारा अपराध कर सकते हैं और किन व्यक्तियों के संगठित आपराधिक गिरोहों के संपर्क में आने की संभावना अधिक है।

आरजेएसएफ यूनिट उन व्यक्तियों पर भी नजर रख रही है जिन्हें संगठित आपराधिक गिरोह अपने नेटवर्क में शामिल करने का प्रयास कर सकते हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार गैंगस्टर गिरोह छोटे अपराधियों, जमानत पर बाहर आए आरोपियों या आपराधिक प्रवृत्ति के युवाओं को अपने नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश करते रहते हैं। यूनिट ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर उनकी गतिविधियों का विश्लेषण कर रही है ताकि उन्हें अपराध की दुनिया में और अधिक सक्रिय होने से पहले चिन्हित किया जा सके। इस रणनीति का उद्देश्य अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय अपराध की संभावना को पहले ही समाप्त करना है।

पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि अपराधी किसी एक जिले तक सीमित नहीं रहते। इसलिए आरजेएसएफ यूनिट द्वारा की गई कार्यवाही भविष्य में राज्य के अन्य जिलों के साथ भी साझा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी अपराधी की गतिविधियों की जानकारी पहले से उपलब्ध होगी तो पुलिस समय रहते आवश्यक कदम उठा सकेगी। इससे अपराध की रोकथाम, निगरानी तथा अंतर-जिला समन्वय को और अधिक मजबूती मिलेगी।

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