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सरकारी बसों में महिलाओं के टिकट नियम में बड़ा बदलाव संभव

सरकारी बसों में महिलाओं के टिकट नियम में बड़ा बदलाव संभव

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने संकेत दिया है कि सरकारी बसों में महिलाओं की निशुल्क यात्रा योजना के तहत टिकट व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जो महिलाएं स्वेच्छा से किराया देकर यात्रा करना चाहती हैं, उनके लिए परिवहन विभाग वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करेगा।

मंगलवार को कोलकाता के कसबा स्थित परिवहन भवन में 50 नई पर्यावरण अनुकूल सरकारी बसों के लोकार्पण के दौरान मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा जारी रखेगी, लेकिन जो यात्री किराया देकर यात्रा करना चाहें, उन्हें भी यह विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा।

राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद महिलाओं के लिए सरकारी बसों में निशुल्क यात्रा की योजना शुरू की गई थी। इसके तहत महिलाओं को पिंक स्मार्ट कार्ड जारी किए गए हैं, जिन्हें दिखाकर वे बिना किराया दिए यात्रा कर सकती हैं। सरकार का कहना है कि इस योजना से बड़ी संख्या में महिला यात्रियों को लाभ मिला है।

हालांकि, कुछ कामकाजी और स्वावलंबी महिलाओं ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि वे अपनी आय से सार्वजनिक परिवहन का निर्धारित किराया देना चाहती हैं। वहीं कुछ महिलाओं का आरोप है कि टिकट व्यवस्था समाप्त होने के बाद कई बार बस चालक या परिचालक निर्धारित स्टॉप पर महिला यात्रियों को देखकर बस नहीं रोकते, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस कारण योजना के क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य में पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने 50 नई सरकारी बसों को हरी झंडी दिखाई। इनमें 43 बसें सीएनजी से संचालित हैं, जबकि सात बसें बैटरी आधारित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में ऐसी और बसें सड़कों पर उतारी जाएंगी।

इस अवसर पर परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह, मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल तथा परिवहन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। सरकार का कहना है कि आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बसों के माध्यम से सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुविधाजनक, सुरक्षित और टिकाऊ बनाया जाएगा।

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