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संतों के पद चिन्हों पर चलने वाले बहुत कम लोग: मायावती


लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने संत रविदास की जयंती पर राजनैतिक दलों को आड़े हाथों पर लिया हैं। उन्होंने कहा कि संत गुरु उपदेशों की उपेक्षा करने वाले लोग राजनीतिक स्वार्थ की खातिर उनको माथा टेकते हुए देखे जा सकते हैं, लेकिन उनके पदचिन्हों पर चलने वाले बहुत कम लोग हैं।



रविवार काे जारी एक बयान में संत रविदास जयंती पर नमन करते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने देश-दुनिया में रहने वाले उनके करोड़ों अनुयायियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' अर्थात मन को शुद्ध रखकर ही इंसान सच्चे सुख की प्राप्ति कर सकता है। देश और समाज का भला कर सकता है, लेकिन उनके पद चिन्हों पर चलने वाले बहुत कम लोग हैं। खासकर सरकारों की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर होने के कारण सुख-शांति व खुशहाली का हर स्तर पर काफी अभाव है। क्योंकि इंसानियत को भुलाकर हर सेवा की कीमत वसूलने की संकीर्ण व स्वार्थ की प्रवृत्ति घातक साबित होकर व्यापक देश व जनहित को प्रभावित कर रही है। इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सं​कीर्णता व द्वेष आदि से त्रस्त आज के माहौल में उनके मानवतावादी संदेश का अत्याधिक महत्व है और इसलिए खासकर शासक वर्ग को हर लिहाज से अपना मन वाकई में चंगा करके शुद्ध मन से काम करने की जरूरत है ताकि समाज और फिर देश सही मायने में हर प्रकार से सुखी और सम्पन्न हो सके, जिसकी कल्पना बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के कल्याणकारी संविधान ने भी की है।



बसपा प्रमुख मायावती ने यह भी जिक्र किया कि संत रविदास के सम्मान और उनकी स्मृति बनाये रखने और इंसानियत के संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए बसपा की सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए। उनमें भदोही जिले का नाम बदलकर संत रविदास नगर किया था, जिसे समाजवादी पार्टी सरकार ने जातिवादी और राजनीतिक द्वेष के कारण समाप्त कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान की भाजपा सरकार ने भी इसका नाम अब तक बहाल नहीं किया, जो यह साबित करता है कि इन पार्टियों की सोच एक जैसी द्वेषपूर्ण व जातिवाद है। बसपा सरकार में वाराणसी में संत रविदास पार्क, घाट की स्थापना, फैजाबाद में संतगुरु रविदास राजकीय महाविद्यालय का निर्माण, चंदौली में संत रविदास पॉलिटेक्निक की स्थापना आदि कार्य किए हैं।

मायावती ने जनता से अपील की है कि वोटों के स्वार्थ की खातिर संतों और महापुरुषों के नाम पर राजनीति करते हैं। उनकी जयंती के मौके पर स्थलों पर जाकर दिखावा करते हुए नजर आते हैं ऐसे लोगों से सावधान रहें।

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