नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया। वित्त मंत्री के बजट भाषण के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:-
-केंद्रीय बजट 2026-27 में इस बार आयकर दरों के स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में वायदा एवं विकल्प (एफ एंड ओ) सौदों पर लगने वाले प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) को बढ़ाकर क्रमशः 0.05 फीसदी और 0.15 फीसदी करने का प्रस्ताव किया है।
–विदेशी पर्यटन पैकेज की बिक्री पर ‘स्रोत पर कर संग्रह’ (टीसीएस) की दर को दो फीसदी का किया गया है। उदारीकृत धनप्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत विदेश में शिक्षा और चिकित्सा खर्च पर टीसीएस को भी दो फीसदी किया है।
–वित्त मंत्री ने कहा कि नया आयकर अधिनियम, 2025 इस साल 1 अप्रैल से लागू होगा, नियम और फॉर्म जल्द जारी होंगे। साथ ही बिना ऑडिट वाले व्यवसायों के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की तारीख 31 अगस्त, 2026 तक बढ़ाई गई है।
–विदेशी कंपनियों को भारत के डेटा सेंटर से वैश्विक सेवाएं प्रदान करने पर 2047 तक मिलेगा ‘कर अवकाश।’ केंद्रीय बजट 2026-27 में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 फीसदी पर रखने का लक्ष्य है, जो पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के 4.4 फीसदी से कम है।
–केंद्रीय बजट 2026-27 में जीडीपी में ऋण का अनुपात 56.1 फीसदी से घटाकर 55.6 फीसदी किया गया है। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल बजट का आकार 53.5 लाख करोड़ रुपये है।
–सरकारी पूंजीगत व्यय को 11.11 लाख करोड़ से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया है। राज्यों को कर हिस्सेदारी के रूप में 1.4 लाख करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव है।
–वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में शुद्ध कर संग्रह 28.7 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। वहीं, सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान।
–वित्त मंत्री ने अपने भाषण में केंद्रीय बजट का तीन कर्तव्यों- वृद्धि की रफ्तार तेज करना, आकांक्षाओं को पूरा करना और सबका साथ, सबका विकास पर ध्यान केंद्रित किया।
–केंद्रीय बजट 2026-27 में सुधारों के ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के तहत 350 से अधिक सुधार लागू करने का प्रस्ताव है। एसएमई के लिए 10,000 करोड़ रुपये का वृद्धि कोष बनाने का प्रस्ताव, भविष्य के चैंपियन बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
–केंद्रीय बजट में सीमा शुल्क के लिए विश्वास-आधारित प्रणाली, पूर्व-निर्धारित कर निर्णय (एडवांस रुलिंग) की वैधता अवधि पांच वर्ष तक बढ़ाई गई है। सेवा क्षेत्र का योगदान वर्ष 2047 तक बढ़ाकर 10 फीसदी करने के लिए उच्चस्तरीय के गठन का प्रस्ताव है।












