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फतेहाबाद: मताना गांव में एक साथ उठी दादा, दादी और पोते की अर्थियां

फतेहाबाद: मताना गांव में एक साथ उठी दादा, दादी और पोते की अर्थियां
हादसे में मृतकों की संख्या हुई सात

फतेहाबाद। राजस्थान के बीकानेर में हुए भीषण सडक़ हादसे ने फतेहाबाद के मताना गांव को ऐसा कभी न भूलने वाला जख्म दिया है, जिसे देखकर हर आंख पथरा गई। मंगलवार को जब गांव मताना में सीनियर अकाउंटेंट ओमप्रकाश, उनकी पत्नी सोरमा देवी और मासूम पोते रोनित के शव एक साथ पहुंचे, तो पूरे गांव में कोहराम मच गया। जिस घर से 15 दिन पहले ही सेवानिवृत्ति कार्यक्रम की खुशियां मनाई गई थी,वहां से एक साथ अर्थियां उठीं। शवों को देखकर इकलौता बेटा सुरेंद्र बार-बार बेहोश हो रहा था। ग्रामीणों ने ढांढस बंधाकर उससे अंतिम क्रियाएं पूरी करवाईं। बिश्नोई समाज की परंपरा के अनुसार, गांव के श्मशान घाट में तीनों शवों को बराबर-बराबर कब्र खोदकर एक साथ दफनाया गया। 

बेटे सुरेंद्र ने अश्रुपूरित आंखों से माता-पिता और अपने कलेजे के टुकड़े को मिट्टी दी। इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर वहां मौजूद हजारों ग्रामीणों के आंसू नहीं रुक रहे थे। हादसे का शिकार हुई खुशी और तनवी को भूना में और प्रमिला को अग्रोहा में अंतिम विदाई दी गई।इस दर्दनाक हादसे में मरने वालों का आंकड़ा बढक़र अब 7 हो गया है। वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से जूझ रही ओमप्रकाश की तीन साल की दोहती यशवी ने भी मंगलवार अलसुबह बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में दम तोड़ दिया। यशवी की मां प्रमिला की हादसे के दिन ही मौत हो गई थी। इस तरह अग्रोहा निवासी अमित सुथार का तो पूरा संसार ही उजड़ गया; हादसे ने उनकी पत्नी प्रमिला और इकलौती बेटी यशवी को हमेशा के लिए छीन लिया। वहीं ओमप्रकाश की दूसरी बेटी बाला देवी की दो बेटियों खुशी और तन्वी की भी इस हादसे में मौत हो चुकी है।

हादसे ने लील लीं तीन पीढिय़ां, सूना हुआ आंगनस्कूलों में गर्मी की छुट्टियां होने के कारण ओमप्रकाश की दोनों बेटियों के बच्चे अपने ननिहाल आए हुए थे। ओमप्रकाश सपरिवार अपनी स्विफ्ट डिजायर गाड़ी से शनिवार को मुकाम धाम के दर्शन करने गए थे। बड़ी बेटी बाला देवी गर्भवती होने के कारण घर पर ही रुक गई थीं, जिससे उनकी जान बच गई, लेकिन उनके पति संदीप सुथार (साइंस टीचर) और वे खुद अब अपनी दोनों बेटियों खुशी व तन्वी को खो चुकी हैं। इस भीषण हादसे के बाद अब ओमप्रकाश के हंसते-खेलते परिवार में केवल बेटा सुरेंद्र, उसकी पत्नी और एक पोती ही जीवित बचे हैं।

15 दिन पहले जिस विदाई पर बंटी थीं मिठाइयां, वहां पसरा मातमजिला विकास एवं पंचायत विभाग में सीनियर अकाउंटेंट पद से रिटायर हुए ओमप्रकाश ने गत 31 मई को ही अपनी सेवानिवृत्ति का जश्न मनाया था। लघु सचिवालय के डीपीआरसी हॉल में हुए भव्य समारोह में 300 से अधिक लोग उनकी इस नई पारी की शुरुआत की बधाई देने पहुंचे थे। 1992 में चंडीगढ़ में क्लर्क के तौर पर भर्ती हुए ओमप्रकाश बेहद मिलनसार और सामाजिक व्यक्ति थे।

 सोमवार दोपहर करीब ढाई बजे जब वे मुकाम धाम से लौट रहे थे, तो श्रीडूंगरगढ़ के हेमासर के पास एक तेज रफ्तार डंपर ने उनकी कार को सामने से सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पुलिस को कटर से गाड़ी की खिड़कियां काटकर शवों को बाहर निकालना पड़ा।ग्रामीण बोले : 60 साल के इतिहास में गांव के लिए सबसे काला दिन

मताना गांव के सरपंच दलबीर वर्मा सहित तमाम ग्रामीणों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन के पिछले 60 वर्षों में ऐसा दर्दनाक मंजर कभी नहीं देखा। पूरा गांव इस समय स्तब्ध और शोकाकुल है। हर घर में चूल्हा तक नहीं जला है। ग्रामीण इस दिन को गांव के इतिहास का सबसे काला दिन मान रहे हैं, जिसने एक ही झटके में तीन पीढिय़ों को खत्म कर दिया।

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