नई दिल्ली,। अयोध्या राम मंदिर में कथित चंदा चोरी मामले और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा सुंदरकांड पाठ एवं हस्ताक्षर अभियान आयोजित किए जाने को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा विधायक हरीश खुराना ने इस मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी पर जुबानी हमला किया। उन्होंने उन पर चुनावी राजनीति के लिए धार्मिक आस्था का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
जब भी चुनाव नजदीक आते हैं, तब केजरीवाल मंदिरों में जाकर माथा टेकते हैं और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उनकी धार्मिक गतिविधियां दिखाई नहीं देतीं।
उन्होंने कहा कि अयोध्या राम मंदिर को लेकर आम आदमी पार्टी के नेताओं के पुराने बयानों को जनता भूली नहीं है। पहले राम मंदिर निर्माण का विरोध करने वाले लोग अब चुनावी लाभ के लिए भगवान राम और सुंदरकांड का सहारा ले रहे हैं।
भव्य राम मंदिर बनने के बाद करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है और चुनाव नजदीक आते ही इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करना केवल राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। दिल्ली विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए खुराना ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान अरविंद केजरीवाल लगातार हनुमान मंदिर समेत कई मंदिरों में दर्शन करने जाते थे, लेकिन चुनाव समाप्त होने और सत्ता से बाहर होने के बाद उन्होंने उन मंदिरों का रुख नहीं किया।
पिछले डेढ़ साल में केजरीवाल कितनी बार भगवान राम या हनुमान के मंदिरों में जाकर दर्शन किए।
राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर हरीश खुराना ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में तत्काल और सख्त कार्रवाई की है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया, गिरफ्तारियां हुईं और मामले की जांच जारी है। इसके बावजूद विपक्षी दल इस घटना को राजनीतिक मुद्दा बनाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने की कोशिश कर रहे हैं।
समाजवादी पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस मुद्दे को जानबूझकर राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। अन्य धार्मिक स्थलों पर होने वाली चोरी या विवादों पर विपक्ष की ओर से ऐसी प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिलती, जबकि अयोध्या के मामले को राजनीतिक कारणों से लगातार उछाला जा रहा है।
भाजपा विधायक ने विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश और देश की जनता विपक्ष की इस राजनीति को समझ रही है। दिल्ली की जनता अपना फैसला दे चुकी है और अब उत्तर प्रदेश की जनता भी चुनाव में उचित जवाब देगी। धार्मिक आस्था के मुद्दों पर राजनीति करने वालों को जवाब देने के लिए जनता तैयार है।





