तेल बाजार के लिए खाड़ी में शांति जरूरी: आईईए

तेल बाजार के लिए खाड़ी में शांति जरूरी: आईईए

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की मांग में सुधार शुरू हो गया है। मई में तेल की मांग घटकर 9.79 करोड़ बैरल प्रतिदिन (97.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन) रह गई थी, जो एक साल पहले की तुलना में 53 लाख बैरल प्रतिदिन कम थी। हालांकि, एजेंसी का अनुमान है कि अक्टूबर तक वैश्विक तेल मांग मई के निचले स्तर से 80 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक बढ़ जाएगी और फरवरी के बाद पहली बार 2025 के स्तर से ऊपर पहुंच जाएगी।

आईईए की ताजा 'ऑयल मार्केट रिपोर्ट' के अनुसार, गर्मियों में यात्रा बढ़ने के कारण ईंधन की मांग में तेजी आएगी। इसके साथ ही पहले से दबी हुई मांग के बाजार में लौटने से भी तेल की खपत को अतिरिक्त बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, एजेंसी का अनुमान है कि 2026 में वैश्विक तेल मांग में 10 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी आ सकती है। 

इसके बाद 2027 में मांग 20 लाख बैरल प्रतिदिन बढ़ने की उम्मीद है। आईईए के मुताबिक, साल के अंत तक वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति मांग से अधिक हो सकती है। हालांकि, यह अनुमान इस बात पर निर्भर करेगा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होती है या नहीं।

 यदि ऐसा होता है तो तेल उत्पादक देश फिर से उत्पादन बढ़ा सकेंगे और मध्य पूर्व समेत अन्य क्षेत्रों की रिफाइनरियां भी पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई सामान्य रूप से शुरू कर सकेंगी। एजेंसी ने कहा कि इस सप्ताह खाड़ी क्षेत्र में फिर से हुई गोलीबारी यह दिखाती है कि यदि स्थायी शांति समझौता नहीं हुआ तो तेल बाजार में सामान्य स्थिति बहाल करना मुश्किल होगा।

 आईईए ने स्पष्ट कहा कि कच्चे तेल के बाजार को स्थिर करने के लिए खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति बेहद जरूरी है। रिपोर्ट के अनुसार, जून में वैश्विक तेल भंडार चार महीने बाद पहली बार 2.1 करोड़ बैरल बढ़ा।

 समुद्र में मौजूद तेल की मात्रा बढ़ने से यह वृद्धि हुई, जिसने जमीन पर मौजूद भंडार में आई कमी की भरपाई कर दी। मई में 7.3 करोड़ बैरल की गिरावट के बाद जून में ओईसीडी देशों के कुल तेल भंडार में 6.2 करोड़ बैरल की और कमी आई, जिसमें से लगभग 4.4 करोड़ बैरल की कमी सरकारी भंडार से तेल जारी किए जाने के कारण रही।

 वहीं, गैर-ओईसीडी देशों के कच्चे तेल के भंडार में भी 3.7 करोड़ बैरल की गिरावट दर्ज की गई, जिसमें अकेले चीन में 4.1 करोड़ बैरल की कमी शामिल रही। आईईए ने कहा कि जून में बेंचमार्क कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट जारी रही और युद्ध के दौरान हुई पूरी बढ़त खत्म हो गई।

 खाड़ी क्षेत्र से तेल टैंकरों की आवाजाही बढ़ने और बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति की आशंका के कारण कीमतों पर दबाव बना। रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्थ सी डेटेड क्रूड की कीमत एक महीने में 22 डॉलर प्रति बैरल गिरकर लगभग 68 डॉलर प्रति बैरल रह गई।


 हालांकि, 7-8 जुलाई को युद्धविराम के उल्लंघन के बाद कीमतों में फिर तेजी आई और रिपोर्ट तैयार किए जाने के समय यह लगभग 77 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रही थी। आईईए ने यह भी कहा कि भले ही बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ी है, लेकिन रिफाइनरियों का संचालन और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई अभी भी धीमी गति से सामान्य हो रही है।

जून में खाड़ी देशों से रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी का निर्यात युद्ध से पहले के स्तर के आधे से भी कम रहा, जबकि कच्चे तेल का निर्यात फरवरी के स्तर के लगभग तीन-चौथाई तक पहुंच गया। रिपोर्ट में कहा गया कि खाड़ी क्षेत्र की प्रमुख निर्यात रिफाइनरियों से लोडिंग अभी पूरी तरह शुरू नहीं हुई है, जिससे संकेत मिलता है कि उनका संचालन अब भी प्रभावित है


इसके अलावा, यूक्रेन द्वारा रूस की रिफाइनरियों और निर्यात ढांचे पर बढ़ते हमलों ने रूस समेत वैश्विक पेट्रोलियम उत्पाद बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है, जिससे निर्यात और घरेलू ईंधन आपूर्ति दोनों प्रभावित हुई हैं।

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