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'ऑपरेशन द्वारका' से लेकर 'PNS गाजी' तक: शहबाज शरीफ के दावों की खुली पोल, 1971 का सच आया सामने

'ऑपरेशन द्वारका' से लेकर 'PNS गाजी' तक: शहबाज शरीफ के दावों की खुली पोल, 1971 का सच आया सामने
ऑपरेशन सिंदूर में पूरी दुनिया ने देखा कि भारत ने पाकिस्तान की कैसी हालत कर दी थी वह अमेरिका के आगे गिड़गिड़ाने लगा इसके बाद भारत ने रहम खाते हुए सीजफायर किया। कई बार मुंह की खा चुका पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है बार-बार हारने के बाद भी अपनी बढ़ाई करता है। एक बार फिर पाकिस्तान के पीएम शाहबाज शरीफ ने पाकिस्तान नेवी डे के मौके पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिश की। 



शहबाज शरीफ ने एक्स पर एक बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने 1965 के युद्ध के ऑपरेशन द्वारका और पनडुब्बी पीएनएस गाजी के शौर्य के पुल बांधे हैं, लेकिन पाकिस्तानी पीएम यह भूल गए कि जिस गाजी की वे डींगें हांक रहे हैं भारतीय नौसेना ने 1971 के युद्ध में उसे समंदर की गहराई में दफना कर दिया था। बता दें 1965 के युद्ध में पाकिस्तान नौसेना ने गुजरात के द्वारका में बने एक गैर-सैन्य रडार स्टेशन पर रात के अंधेरे में गोलाबारी की थी। सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक इस हमले का कोई बड़ा सामरिक या रणनीतिक प्रभाव नहीं पड़ा था और गुजरात के तटों को कोई भारी नुकसान नहीं हुआ था। 



इसके बावजूद पाकिस्तान इस मामूली घटना को दशकों से अपने काल्पनिक शौर्य का सबसे बड़ा प्रतीक बनाकर पेश करता आ रहा है। पाकिस्तान दावा करता है उसने भारतीय नौसेना के कई जहाजों को डूबो दिया था, लेकिन हकीकत ये है कि द्वारका में भारतीय नौसेना का ना उस वक्त कोई पोर्ट था और ना ही आज कोई पोर्ट है। एक पोर्ट है जो द्वारका शहर के बजाय वहां से करीब 30 किलोमीटर दूर ओखा नाम के बंदरगाह शहर में स्थित है जिसे आईएनएस द्वारका के नाम से जाना जाता है। 


साल 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तानी नौसेना ने द्वारका शहर पर बमबारी की थी। उस वक्त वहां नौसेना की मौजूदगी ही नहीं थी। इस हमले के बाद भारत सरकार ने इस रणनीतिक क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करने के लिए 1966 में एक चौकी बनाई जिसे 26 नवंबर 1972 को पूर्ण रूप से आईएनएस द्वारका के नाम से कमीशन किया गया। इसके अलावा शहबाज शरीफ ने अपने बयान में जिस पनडुब्बी पीएनएस गाजी का महिमामंडन किया है उसका असली इतिहास भी पाकिस्तान के लिए शर्मिंदगी से भरा है। 


1971 के युद्ध में पाकिस्तान ने अमेरिका से ली गई इस अत्याधुनिक पीएनएस गाजी पनडुब्बी को भारत के विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को तबाह करने के गुप्त मिशन पर भेजा था, लेकिन भारतीय नौसेना के जांबाजों ने चालाकी से आईएनएस राजपूत के जरिए जाल बिछाया और विशाखापट्टनम तट के पास पानी के भीतर ही गाजी को डुबा दिया। दिसंबर 1971 की रात पीएनएस गाजी अपने पूरे क्रू मेंबर्स के साथ समंदर में डूब गया। पाकिस्तान आज तक इस हार के सच को स्वीकार करने से बचता है।


इतना ही नहीं 4-5 दिसंबर 1971 की रात को भारतीय मिसाइल बोट्स ने कराची बंदरगाह पर धावा बोला और पाकिस्तान के युद्धपोतों पीएनएस ख़ैबर और पीएनएस मुहाफिज को भी पानी में डुबा दिया। भारत के मिसाइल हमलों से कराची के तेल टैंक हफ्तों तक जलते रहे जिससे पाकिस्तान की नौसेना और अर्थव्यवस्था पूरी तरह पंगु हो गई थी, लेकिन शहबाज शरीफ पाकिस्तान की फितरत के मुताबिक अपनी डींगे हांक रहे हैं।

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