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रूस ने किया यूक्रेन ड्रोन पर अटैक: एस. जयशंकर ने जेलेंस्की से की मुलाकात दिया PM मोदी का ये संदेश

रूस ने किया यूक्रेन ड्रोन पर अटैक: एस. जयशंकर ने जेलेंस्की से की मुलाकात दिया PM मोदी का ये संदेश
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर इन दिनों यूक्रेन की महत्वपूर्ण यात्रा पर हैं, जहां उन्होंने राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और उनके यूक्रेनी समकक्ष आंद्रेई सिबिहा से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान भारत ने स्पष्ट किया कि संघर्षों का यह दौर युद्ध का नहीं है और समाधान केवल बातचीत व कूटनीति के माध्यम से ही संभव हैं। इसी दौरान, यूक्रेन ने एक चौंकाने वाला दावा किया कि जब भारतीय प्रतिनिधिमंडल कीव में मौजूद था, तभी रूसी सेना ने शाहेद ड्रोन से राजधानी पर हमला कर दिया।


जयशंकर ने यूक्रेन को भरोसा दिया कि युद्ध को समाप्त करने के लिए भारत हर संभव मदद करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि संघर्ष के हर बीतते दिन का मतलब है और ज़्यादा मौतें तथा और ज़्यादा तबाही, और इसका समाधान शामिल पक्षों को ही निकालना है, लेकिन अगर भारत किसी भी तरह से मदद कर सकता है, तो हम तैयार हैं।यूक्रेनी राष्ट्रपति ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस घटना की पुष्टि की। यूक्रेन की वायुसेना के कॉम्बेट एविएशन ने इन ड्रोनों को सफलतापूर्वक मार गिराया, जिससे भारतीय प्रतिनिधिमंडल पूरी तरह सुरक्षित रहा। यह घटना एक बार फिर इन घातक ड्रोनों की विनाशकारी क्षमता और उनकी बढ़ती प्रासंगिकता को उजागर करती है।


शाहेद ड्रोन, जिन्हें ईरान की शाहेद एविएशन इंडस्ट्रीज ने विकसित किया है, रूस द्वारा यूक्रेन में बड़े पैमाने पर उपयोग किए जा रहे हैं। ये ड्रोन कामिकाज़े या सुसाइड ड्रोन के रूप में जाने जाते हैं, जो अपने लक्ष्य से टकराने के बाद विस्फोट करते हैं, जिससे बड़ा नुकसान होता है। इनकी रेंज 1000 से 2500 किलोमीटर तक होती है। इसके अलावा, ये ड्रोन काफी ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं और इनकी रफ्तार लगभग 200 मील प्रति घंटे रहती है, जिससे इन्हें रडार पर पकड़ना और हवा में देखना बेहद मुश्किल हो जाता है। जयशंकर ने कीव में अपने यूक्रेनी समकक्ष आंद्रेई सिबिहा के साथ व्यापक बातचीत की, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई। 


बाद में, उन्होंने राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की और उन्हें प्रधानमंत्री मोदी की ओर से शुभकामनाएं और बधाई संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उनकी बातचीत जारी संघर्ष को खत्म करने के तरीकों पर केंद्रित थी, जो भारत की लगातार बातचीत और कूटनीति के माध्यम से शांति की अपील की नीति के अनुरूप है। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब युद्ध के मैदान में तनाव बढ़ रहा है, और भारत विश्व मंच पर शांति स्थापित करने में अपनी भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है।

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