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जलपाईगुड़ी के कलाबाड़ी चाय बागान में जंगली जानवरों का उपद्रव रोकने के लिए सुंदरवन जैसी ‘नेट फेंसिंग’

जलपाईगुड़ी के कलाबाड़ी चाय बागान में जंगली जानवरों का उपद्रव रोकने के लिए सुंदरवन जैसी ‘नेट फेंसिंग’
जलपाईगुड़ी। उत्तर बंगाल में तेंदुए के लगातार बढ़ते हमलों से परेशान लोगों के लिए राहत की उम्मीद दिखी है। सुंदरवन में रॉयल बंगाल टाइगर को रोके रखने के लिए जिस तरह जंगली क्षेत्र के पास नेट फेंसिंग लगाई गई थी, उसी मॉडल पर अब जिले के नागराकाटा के कलाबाड़ी चाय बागान में भी परीक्षण के तौर पर नेट फेंसिंग लगाने का काम शुरू किया गया है। उत्तर बंगाल के कई इलाकों खासकर चाय बागान और जंगल से सटे गांवों में तेंदुए का आतंक इतना बढ़ गया है कि लोग रात में भी भय में रहते हैं। इन्हीं घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग ने नेट फेंसिंग लगाने का काम शुरू किया है।

उत्तर बंगाल वन विभाग के मुख्य वनपाल (वन्यजीव) भास्कर जेवी ने बताया कि नेट फेंसिंग लगाने के बाद इसकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि यह तरीका सफल होता है, तो इसे अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि कलाबाड़ी के हुलाश लाइन नामक मजदूर बस्ती के पास लगभग 250 मीटर क्षेत्र में 10 फीट ऊंची नायलॉन की नेट फेंसिंग लगाई जा रही है। इससे तेंदुए बागान से निकलकर आबादी वाले इलाकों में प्रवेश नहीं कर पाएगा। वहीं, वन अधिकारियों का अनुमान है कि हाथियों के झुंड भी रास्ता बदलने को मजबूर हो सकते हैं। बिन्नागुड़ी रेंज ऑफिसर हिमाद्री देवनाथ ने कहा, स्थानीय लोग इस पहल का स्वागत कर रहे है। साथ ही हमारी निरंतर निगरानी भी जारी रहेगी।

उल्लेखनीय है कि कलाबाड़ी चाय बागान में लंबे समय से तेंदुए का आतंक रहा है। पिछले सात महीनों में पांच तेंदुए को पिंजरे में कैद किया गया है। जबकि पिछले एक साल में इलाके के 10-12 लोग तेंदुओं के हमलों में घायल हो चुके है। सबसे दुखद घटना 18 जुलाई को तेंदुए के हमले में एक तीन साल के बच्चे की मौत हो गई थी। स्थानीय लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि इस नई फेंसिंग तकनीक से मानव तथा वन्यजीव संघर्ष में कमी आएगी।

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