भड़काऊ बयान मामले में दो थानों से नोटिस मिलने पर बोले हुमायूं कबीर — 'गिरफ्तार करना है तो कर लें, परवाह नहीं'
मुर्शिदाबाद। विवादित "साटाभांगा मार" टिप्पणी को लेकर रेजिनगर के विधायक हुमायूं कबीर को दो अलग-अलग थानों से पुलिस ने पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। हालांकि हुमायूं कबीर ने स्पष्ट कर दिया है कि वह निर्धारित तारीख पर एक थाने में पेश नहीं होंगे और इस कार्रवाई को गंभीरता से नहीं लेते।
बुधवार को मीडिया से बातचीत में हुमायूं कबीर ने कहा, "मुझे दो नोटिस मिले हैं। तीन जुलाई, शुक्रवार को मैं नहीं जाऊंगा। उसके अगले दिन जाने के बारे में सोच रहा हूं। थाने जाकर क्या होगा? गिरफ्तार करेंगे तो कर लें। हुमायूं इन बातों की परवाह नहीं करता।"
विवाद की शुरुआत पिछले शुक्रवार को रेजिनगर के काशीपुर में आयोजित एक जनसभा से हुई थी। वहां हुमायूं कबीर ने कहा था कि भाजपा चुनाव जीतकर सरकार बना चुकी है, लेकिन मुर्शिदाबाद में हारने के बावजूद कुछ लोग ऐसा व्यवहार कर रहे हैं जैसे वही विधायक हों। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि उन्होंने मुसलमानों को एकजुट कर "साटाभांगा मार" शुरू कर दिया तो विरोधियों को भागने का रास्ता नहीं मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि उनके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं।
इसके बाद शक्तिपुर की एक सभा में भी उन्होंने पुलिस को लेकर विवादित बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले उनके भतीजे को गिरफ्तार किया गया था और कहा कि पहले संबंधित थाना प्रभारी को देखेंगे, फिर उसके पिता को। उन्होंने दस हजार लोगों के साथ थाना घेरने और अधिकारी को बाहर निकालने की भी चेतावनी दी थी।
सोमवार को विधानसभा में इस पूरे विवाद पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, "अब बहुत हो चुका। ऐसे लोगों को सबक सिखाने का समय आ गया है। याद रखिए, अब राज्य में कमजोर मुख्यमंत्री नहीं हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में दो मामले दर्ज किए हैं और कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी। मैं एक सप्ताह के भीतर मुर्शिदाबाद जाऊंगा। इस देश में कानून सर्वोपरि है, किसी व्यक्ति की मनमानी नहीं चलेगी।"
मुख्यमंत्री के बयान के बाद पुलिस ने संबंधित कार्यक्रम के तीन आयोजकों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मंगलवार सुबह पुलिस हुमायूं कबीर के घर पहुंची और दोनों मामलों में पूछताछ के लिए नोटिस सौंपा।
नोटिस मिलने के बावजूद हुमायूं कबीर अपने रुख पर कायम दिखे। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें जेल भेजा गया तो वह "जेल भरो आंदोलन" शुरू करेंगे और देखेंगे कि प्रशासन उनके खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।





