कोलकाता।
राज्यपाल आर. एन. रवि ने कहा कि जो गुरु मन को प्रकाशित करते हैं, चरित्र का निर्माण करते हैं और नई पीढ़ी को सही दिशा देते हैं, उनके श्रीचरणों में हार्दिक प्रणाम है।
उन्होंने कहा कि भारत की सनातन ज्ञान परंपरा में गुरु ज्ञान, प्रज्ञा और मूल्यों के प्रमुख स्रोत रहे हैं। गुरुकुल और गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से अनेक पीढ़ियों को विद्या, विवेक, धर्म और कर्तव्य का ज्ञान दिया गया। गुरुजनों ने विद्यार्थियों की चिंतन शक्ति को विकसित करने के साथ उनके चरित्र का निर्माण किया और जीवन के लक्ष्य तथा दायित्व के प्रति गहरी समझ विकसित की।
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान शिक्षक समाज इस कालजयी परंपरा को गौरव के साथ आगे बढ़ा रहा है। शिक्षक विद्यार्थियों में ज्ञान की जिज्ञासा जगाते हैं, स्वतंत्र चिंतन की क्षमता विकसित करते हैं, उनकी छिपी प्रतिभा को सामने लाते हैं और उन्हें निरंतर बेहतर करने के लिए प्रेरित करते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षक युवा पीढ़ी को ज्ञान, आत्मविश्वास और नैतिक चरित्र से समृद्ध कर रहे हैं, ताकि वे दृढ़ विश्वास के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें। यही युवा भारत के पुनरुत्थान का नेतृत्व करते हुए विश्वगुरु के रूप में भारत के गौरवशाली भविष्य के निर्माण के संकल्प को साकार करेंगे।
राज्यपाल ने शिक्षक दिवस पर देश और समाज के निर्माण में योगदान देने वाले सभी शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की।





