लखनऊ। इस समय उत्तर प्रदेश के सियासी केन्द्र में नीला रंग आ गया है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शुक्रवार काे नीले रंग काे लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने साेशल मीडिया एक्स पर पाेस्ट करते हुए लिखा कि, नीला कपड़ा और गमछा पहनने व नीला स्टेज लगाने से गरीबाें और उपेक्षित वर्गों के प्रति वर्षों से चली आ रही उनकी जातिवादी और पूंजीवादी सोच नहीं बदल सकती। न ही ये लोग दिल से अम्बेडकरवादी होने एवं कहलाने वाले हैं। इसीलिये ’बहुजन समाज’ के वास्तविक हित व कल्याण के प्रति पहले वे अपना दिल व दिमाग़ तो पाक-साफ करें।
उप्र की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि वैसे भी ये लोग इन वर्गों के मामले में आए दिन गिरगिट की तरह ही रंग बदलते रहते हैं। अर्थात ये कहते कुछ हैं और करते उसके ठीक विपरीत हैं। ख़ासकर इनके सपा के पीडीए के मामले में तो इनकी सोच, चाल, चरित्र व चेहरा आदि हमेशा दोग़ला व बईमान ही रहा है, जिसके अनेकों उदाहरण हैं। ये सभी जानते हैं। इसलिए इन वर्गों की एकमात्र हितैषी व अम्बेडकरवादी पार्टी केवल बसपा ही है, जो सर्वविदित है।
बसपा से निकाले लोग अवसरवादी
मायावती ने कहा कि बसपा से जो भी लोग पार्टी में अनुशासनहीनता आदि के कारण समय-समय पर निकाले जाते हैं तो वे अधिकतर इन्हीं सब कारणों से अब तक कई पार्टी बदल चुके हैं। इसी से ही अन्दाज़ा लगा लेना चाहिए कि ये लोग पूरे स्वार्थी व अवसरवादी हैं। वे किसी भी पार्टी के हित में नहीं हो सकते हैं। इतना ही नहीं बल्कि जिनको पार्टी से निकाल दिया जाता है तो उनमें से कुछ लोग दूसरी पार्टियों के हाथों में खेलकर छोटी-छोटी पार्टियाँ व संगठन आदि भी बना लेते हैं, जिनसे ’बहुजन समाज’ का सामूहिक हित नहीं हो सकता है।
हालांकि ऐसी पार्टियाँ बिना किसी गठबन्धन के भी चुनाव नहीं लड़ सकती हैं। किसी भी पार्टी की सरकार बनने पर सरकार में शामिल हुए बिना भी नहीं रह सकती हैं, जो पार्टी से निकाले हुए लोगों को अक्सर अपनी पार्टी में लेने की बात करते हैं या उन्हें पार्टी बनाने की भी सलाह देते हैं, तो वे पहले अपने गिरेबान में भी झाँककर ज़रूर देख लें।
कांग्रेस डूबता हुआ जहाज
बसपा प्रमुख ने कहा कि कांग्रेस पार्टी, जिन निकाले हुए लोगों को अपनी पार्टी में लेने की बात कर रही है, तो ऐसी पार्टी में जो डूबते जहाज़ की तरह है, उसमें भला कौन शामिल होकर अपने भविष्य को अन्धकार में डालेगा। जबकि ख़ासकर इस पार्टी से दूरी बनाने के लिए बाबा साहब डाॅ. भीमराव अम्बेडकर ने अपने जीते-जी बहुजन समाज के लोगों को अगाह (चेताया) भी किया था। इसलिए यह सब वर्तमान हालात में, पार्टी व मूवमेन्ट के हित में बसपा के लोगों को जानना व समझना भी बहुत ज़रूरी है तो यह उचित होगा।
अशोक सिदार्थ काे मजबूरन संन्यास लेना पड़ा
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि जिस दिन बसपा ने अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने काे कहा तो उस दिन उन्होंने अपने संन्यास लेने की घोषणा तब तत्काल नहीं की थी। क्योंकि उस दिन यह पूरी रातभर इसे रुकवाने के लिए क़िस्म-क़िस्म के हथकण्डे इस्तेमाल करते रहे। इसमें उन्हें जब कामयाबी नहीं मिली ताे मजबूरन अगले दिन संन्यास की घोषणा करनी पड़ी है। इसके बारे में सही समय आने पर पार्टी के लोगों को और भी बहुत कुछ ज़रूर बताया जायेगा।





