लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्हें ब्राह्मण वोट के लिए जनेश्वर मिश्रा याद आते हैं और राज करने के लिए सिर्फ अपना परिवार। ब्राह्मण वोट दें, इन्हें गद्दी दिलाएं और ये उस पर अपने परिवार की खड़ाऊँ रखकर राज करेंगे।
अच्छा होता कि जनेश्वर मिश्रा की जयंती का सदुपयोग उनके व्यक्तित्व और उनके समाजवादी विचार से अवगत कराने के लिए किया गया होता। जनेश्वर के बारे बताने से ज्यादा मुझे कोसा गया। दुनिया को ज्ञान का प्रकाश देने वाले ब्राह्मणों को याचकों की भांति अपमानित किया गया।
यह सब नाटक देखकर जनेश्वर की समाजवादी आत्मा यकीनन दुःखी होगी और सोच रही होगी कि यह सब करने के लिए मेरी ही जयंती मिली थी।
बृजेश पाठक ने कहा कि चंद टिकटार्थियों के कारण आज पूरे ब्राह्मण समाज को अपमानित करना उचित नहीं। मुझे चाहे जितनी गालियां दीजिए पर ब्राह्मण समाज की गरिमा न गिराइए।
बृजेश पाठक ने कहा कि चंद टिकटार्थियों के कारण आज पूरे ब्राह्मण समाज को अपमानित करना उचित नहीं। मुझे चाहे जितनी गालियां दीजिए पर ब्राह्मण समाज की गरिमा न गिराइए।
उन्होंने कहा कि ये एक ऐसी समाजवादी पार्टी (सपा) है जो रामायण मेला के संकल्पक क्रांतिधर्मी चिंतक राममनोहर लोहिया और छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र के दिखाए समाजवाद के पथ, आदर्श और संस्कारों से पूर्णतया भटक चुकी है। डॉ. लोहिया संसद और विधान सभाओं को सार्थक परिणामों वाली बहस का मंच बनाना चाहते थे, अटलजी उनका पूरा सहयोग करते थे। यायावरी प्रकृति के होने के बावजूद लोहिया संसद सत्र के दौरान पूरा समय बहस व संसदीय संवादों को देते थे। छोटे लोहिया जनेश्वर ने इस परम्परा को बढ़ाया। उन्होंने हमेशा समकालीन आंदोलनों की अगुवाई की लेकिन संसद सत्र के दौरान चर्चाओं को प्राथमिकता देते थे। सत्र बाधित नहीं करते थे।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि आज के सपाई दिल्ली और लखनऊ में जनता के सवालों को सत्र में उठने तक नहीं देना चाहते। इतना हो हल्ला मचाते हैं, कुतर्क करते हैं कि सदन चलाना मुश्किल हो जाए। विपक्ष के लोग संविधान की पुस्तक हाथ में लेकर फोटो खिचाने में जितना आगे रहते हैं, उससे भी ज्यादा संवैधानिक पीठ और परंपराओं का मज़ाक उड़ाने में आगे रहते हैं। मेरी सपा के साथियों को सलाह है कि लोहिया और छोटे लोहिया के बारे कभी कभार पढ़ लिया करें। जनेश्वर की जयंती पर जो नाटकबाजी हुई, उसे देखकर जनेश्वर मिश्र की आत्मा यकीनन दुःखी होगी। अटलजी कहते थे महापुरुषों की सच्ची श्रद्धांजलि उनके द्वारा स्थापित परम्पराओं को आगे बढ़ाना है। नई सपा में समाजवाद, सामाजिक न्याय और समरसता बाईस्कोप से खोजने पर भी नहीं मिलता।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि आज के सपाई दिल्ली और लखनऊ में जनता के सवालों को सत्र में उठने तक नहीं देना चाहते। इतना हो हल्ला मचाते हैं, कुतर्क करते हैं कि सदन चलाना मुश्किल हो जाए। विपक्ष के लोग संविधान की पुस्तक हाथ में लेकर फोटो खिचाने में जितना आगे रहते हैं, उससे भी ज्यादा संवैधानिक पीठ और परंपराओं का मज़ाक उड़ाने में आगे रहते हैं। मेरी सपा के साथियों को सलाह है कि लोहिया और छोटे लोहिया के बारे कभी कभार पढ़ लिया करें। जनेश्वर की जयंती पर जो नाटकबाजी हुई, उसे देखकर जनेश्वर मिश्र की आत्मा यकीनन दुःखी होगी। अटलजी कहते थे महापुरुषों की सच्ची श्रद्धांजलि उनके द्वारा स्थापित परम्पराओं को आगे बढ़ाना है। नई सपा में समाजवाद, सामाजिक न्याय और समरसता बाईस्कोप से खोजने पर भी नहीं मिलता।
संसद और उत्तर प्रदेश विधान सभा मानसून सत्र संचालन के दौरान किए गए अनावश्यक सिद्धांतहीन अराजक हो-हल्ला दर्शाती है कि सपा पूरी तरह से समाजवाद की संवाद करने के संस्कार को छोड़, अपने आपको एक हुडदंगी गिरोह में बदल चुकी है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्राह्मण इनके लिए वोट बैंक की लार सरीखा है। ये बस चुनाव तक उसकी खातिर जमकर लार टपकाएँगे और उसके बाद पूछेंगे कि कौन ब्राह्मण ? किसका ब्राह्मण ? कहाँ का ब्राह्मण ?





