कृषि को बढ़ावा: कोटाबाग में नाबार्ड समर्थित जैव नियंत्रण इकाई शुरू
नैनीताल। नैनीताल जनपद के कोटाबाग विकासखंड के ग्राम गिन्तीगांव में नाबार्ड के वित्तीय सहयोग से स्थापित जैव नियंत्रण उत्पादन इकाई का शनिवार को शुभारंभ किया गया। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर के कीट विज्ञान विभाग तथा कास्तकार विकास समिति के संयुक्त सहयोग से स्थापित इस इकाई का उद्देश्य प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना तथा किसानों को गुणवत्तापूर्ण जैव नियंत्रण एजेंट उपलब्ध कराना है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार परियोजना की कुल लागत 43.57 लाख रुपये है, जिसमें नाबार्ड ने 30.90 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया है। इस परियोजना के माध्यम से पर्यावरण अनुकूल कीट प्रबंधन तकनीकों का प्रसार करने के साथ ही रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखा गया।
कार्यक्रम में गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के निदेशक (अनुसंधान), कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता, नाबार्ड नैनीताल के जिला विकास प्रबंधक, कीट विज्ञान एवं पादप रोग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र नैनीताल के वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, वरिष्ठ बैंक अधिकारी, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि तथा क्षेत्र के लगभग 80 प्रगतिशील कृषकों ने भाग लिया।
परियोजना समन्वयक डॉ. आरपी मौर्य ने परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस पहल से किसानों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण जैव नियंत्रण एजेंट उपलब्ध होंगे। इससे रासायनिक कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग कम होगा, उत्पादन लागत में कमी आएगी तथा प्राकृतिक एवं जैविक कृषि को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने परियोजना की प्रगति, किसानों के प्रशिक्षण, प्रदर्शन कार्यक्रमों तथा भविष्य की कार्ययोजना की भी जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने नवस्थापित जैव नियंत्रण उत्पादन प्रयोगशाला का अवलोकन किया। उन्हें आधुनिक संयंत्रों एवं मशीनरी, लाभकारी सूक्ष्मजीवों की तैयार की जा रही कल्चर, जैव नियंत्रण एजेंटों के उत्पादन की वैज्ञानिक प्रक्रिया तथा गुणवत्ता परीक्षण प्रणाली की जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि यहां तैयार होने वाले जैव नियंत्रण उत्पाद किसानों को सुरक्षित, प्रभावी एवं पर्यावरण अनुकूल विकल्प उपलब्ध कराएंगे।
नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक ने कहा कि नाबार्ड केवल वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली संस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, कृषि नवाचार एवं सतत आजीविका संवर्धन का प्रमुख भागीदार है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और सुरक्षित खाद्य उत्पादन की वर्तमान आवश्यकता को देखते हुए जैव नियंत्रण आधारित तकनीकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह इकाई किसानों के लिए प्रशिक्षण, अनुसंधान, प्रदर्शन और तकनीकी मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगी तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को नई गति प्रदान करेगी।
कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने किसानों से जैव नियंत्रण तकनीकों को अपनाने तथा रासायनिक कीटनाशकों का विवेकपूर्ण उपयोग करने का आह्वान किया। किसानों ने इस पहल को सुरक्षित, टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए इसकी सराहना की। आयोजकों ने इसे जनपद नैनीताल में वैज्ञानिक, पर्यावरण अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।





