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सावधान: बार-बार होने वाली खट्टी डकार सिर्फ 'गैस' नहीं, हो सकती है जीईआरडी नामक गंभीर बीमारी

सावधान: बार-बार होने वाली खट्टी डकार सिर्फ 'गैस' नहीं, हो सकती है जीईआरडी नामक गंभीर बीमारी

सामान्य एसिडिटी भारी या मसालेदार भोजन के बाद कभी-कभार होती है और कुछ समय में अपने आप ठीक हो जाती है। इसके विपरीत, जीईआरडी में एसिड रिफ्लक्स की समस्या लगातार बनी रहती है और इसके लक्षण विशेष रूप से खाना खाने के बाद या लेटने पर अधिक गंभीर रूप ले लेते हैं।


कभी-कभार मसालेदार या तला-भुना भोजन करने के बाद सीने में जलन, बार-बार खट्टी डकार आना या मुंह में खट्टा और कड़वा पानी आना जैसी परेशानी होना आम बात हो सकती है, लेकिन अगर ये लक्षण लगातार या बार-बार दिखाई दें तो यह गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (जीईआरडी) का संकेत हो सकता है। जीईआरडी ऐसी स्थिति है, जिसमें पेट का एसिड या पेट की अन्य सामग्री बार-बार वापस भोजन नली यानी इसोफेगस में पहुंचने लगती है। इससे सीने में जलन, खट्टी डकार, गले में जलन और मुंह में खट्टा स्वाद जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 


विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार होने वाली सीने की जलन को केवल गैस मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज करना उचित नहीं है। सामान्य एसिडिटी और जीईआरडी में अंतर लक्षणों की बारंबारता और उनकी गंभीरता से समझा जा सकता है। कभी-कभी अधिक भोजन करने या मसालेदार खाने के बाद होने वाली जलन आमतौर पर कुछ समय में कम हो जाती है। वहीं, यदि पेट का एसिड बार-बार भोजन नली में लौटने लगे और परेशानी लगातार बनी रहे, तो चिकित्सकीय जांच की जरूरत पड़ सकती है। कई लोगों में खाना खाने के बाद या लेटने पर इसके लक्षण ज्यादा महसूस होते हैं। 

जीईआरडी के सामान्य लक्षणों में सीने में जलन, बार-बार खट्टी डकार, मुंह में खट्टा या कड़वा स्वाद, पेट की सामग्री गले तक आने का अहसास, गले में खराश, निगलने में परेशानी, लंबे समय तक खांसी, बार-बार गला साफ करने की जरूरत और आवाज में भारीपन शामिल हो सकते हैं।  हालांकि, हर व्यक्ति में इसके लक्षण एक जैसे दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। मोटापा, जरूरत से ज्यादा खाना, कुछ खाद्य पदार्थ और असंतुलित जीवनशैली जीईआरडी का जोखिम बढ़ा सकते हैं। 


भोजन नली और पेट के बीच मौजूद निचला इसोफेजियल स्फिंक्टर ठीक तरह से काम नहीं करने पर भी पेट की सामग्री ऊपर की ओर आ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सीने में जलन या खट्टी डकार बार-बार हो, लंबे समय तक बनी रहे या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित करने लगे, तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

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