नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है; यह सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित होता है।
गुरुवार को रात 12:21 बजे से अगली सुबह तड़के 2:06 बजे तक अमृत काल रहेगा, जबकि सुबह 4:13 से 5:01 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा।
इस दिन सुबह 5:49 बजे सूर्योदय और शाम 7:12 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, रात 9:11 बजे चन्द्रोदय और सुबह 8:26 बजे चन्द्रास्त होगा।
पंचांग के अनुसार, 2 जुलाई 2026 को सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जिसके स्वामी राहु हैं।
चंद्रमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में गोचर करेंगे और इसके बाद यह श्रवण नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।
वहीं, 2 जुलाई 2026 (गुरुवार) को हर्षण योग प्रभावी नहीं रहेगा। इस दिन वैधृति योग सुबह 11:09 तक रहेगा, उसके बाद विषकुंभ योग लगेगा।
गुरुवार को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:04 से दोपहर 12:57 बजे तक रहेगा।
यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। इस दौरान बिना किसी राहुकाल या अन्य अशुभ समय की चिंता किए कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या व्यापार शुरू किया जा सकता है।
वहीं, राहुकाल दोपहर 2:10 से 3:54 बजे तक रहेगा, गुलिक काल सुबह 8:57 से 10:41 बजे तक रहेगा, और सुबह 05:28 से 07:12 बजे तक यमगंड रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इनको अशुभ समय माना जाता है।
वहीं, 2 जुलाई को सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा मकर राशि में गोचर करेंगे।
2 जुलाई 2026 (गुरुवार) को दक्षिण दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। अगर यात्रा करना आवश्यक भी है, तो कुछ अचूक ज्योतिषीय उपायों का पालन करना चाहिए।





