नई दिल्ली। शिक्षक दिवस पर लोकसभा में नेता-प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश के सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं दी और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को उनकी जयंती पर याद किया।
आपका योगदान अमूल्य है।"
राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाया और पोस्ट में लिखा, "आज भारत की शिक्षा व्यवस्था हमारे सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। हमें मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी है, जहां हर छात्र को समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और एक उज्ज्वल भविष्य मिले।"
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 'एक्स' पर पोस्ट किया।
उन्होंने लिखा, "शिक्षक ही लोगों की सोच को आकार देते हैं, उनमें अच्छे संस्कार डालते हैं और हमारे देश के भविष्य की नींव रखते हैं। शिक्षक दिवस पर हम उन सभी शिक्षकों का सम्मान करते हैं, जिनका ज्ञान, धैर्य और समर्पण पीढ़ियों को प्रेरित करता है। हम भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन को भी श्रद्धांजलि देते हैं, जो एक महान दार्शनिक, शिक्षक और राजनेता थे। उनकी बुद्धिमत्ता हमेशा प्रेरणा देती रहेगी।"
बता दें कि डॉ. राधाकृष्णन का योगदान शिक्षा के क्षेत्र में बहुत बड़ा रहा है।
साल 1948 में उनकी अध्यक्षता में 'विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग' का गठन किया गया था, जिसने स्वतंत्र भारत में उच्च शिक्षा की रूपरेखा तैयार की और 'विश्वविद्यालय अनुदान आयोग' (यूजीसी) की स्थापना की मजबूत सिफारिश की थी।
1952 में वे भारत के पहले उपराष्ट्रपति बने और 1962 में देश के दूसरे राष्ट्रपति बने, लेकिन इसके बाद भी उनका जीवन बेहद सादा रहा। कहा जाता है कि जब वे राज्यसभा के सभापति थे, तो सदन में तीखी बहस होने पर वे अचानक संस्कृत के श्लोक या बाइबिल की पंक्तियां पढ़ने लगते थे, जिससे तनाव भरा माहौल तुरंत शांत हो जाता था।
1962 में जब उन्होंने राष्ट्रपति का पद संभाला, तो उनके कुछ पुराने छात्रों और दोस्तों ने 5 सितंबर को उनका जन्मदिन बड़े स्तर पर मनाने की इजाजत मांगी। इस पर उन्होंने बड़ी विनम्रता से जवाब दिया, जो उनके महान चरित्र का सबसे बड़ा सबूत है।
उन्होंने कहा था, "मेरा जन्मदिन मनाने के बजाय, यदि 5 सितंबर को 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाए, तो यह मेरे लिए गर्व की बात होगी।" तभी से हर साल 5 सितंबर को देशभर में शिक्षक दिवस मनाया जाता है।





