नई दिल्ली। मानसून सत्र के दूसरे दिन भी संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही भारी हंगामे के कारण नहीं चल सकी। लगातार शोर-शराबे और नारेबाजी के बीच लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बुधवार, 22 जुलाई, सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। विपक्ष का कहना है कि वे संसद में नीट परीक्षा, पेपर लीक व जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का विषय उठाना चाहते हैं।
वहीं राज्यसभा में उपसभापति ने विपक्ष से शांति बनाए रखने और नियम आधारित कार्यवाही से चलने का अनुरोध किया। लेकिन दोनों ही सदनों में हंगामा जारी रहा और संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राज्यसभा की कार्यवाही पहले 12 तक स्थगित की गई लेकिन 12 बजे भी यही क्रम चालू रहा। इसके बाद सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित की गई। दो बजे भी सदन में हंगामा बरकरार रहा जिस को देखते हुए सदन की कार्यवाही अगले दिन यानी बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं लोकसभा में भी विपक्ष ने नारेबाजी की।
भारी हंगामे के चलते यहां भी कार्यवाही बुधवार तक के लिए तक स्थगित की गई। कांग्रेस समेत विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा में नियम 267 के तहत काम रोकने का नोटिस दिया था। ये सांसद नीट यूजी 2026 व पेपर लीक मामले पर तुरंत चर्चा कराने की मांग कर रहे थे। सत्र शुरू होते ही विपक्षी दलों के सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हुए सदन के वेल में पहुंच गए।
सांसदों ने नारेबाजी की और सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। हंगामे के कारण दोनों सदनों में प्रश्नकाल और सूचीबद्ध विधायी कार्य नहीं हो सके। पीठासीन अधिकारियों ने कई बार सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने देने की अपील की, लेकिन विपक्षी सांसदों के हंगामे के चलते कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। लोकसभा में विपक्षी सांसदों के वेल में आने और लगातार नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही बाधित रही।
इसी तरह राज्यसभा में भी विपक्षी सदस्यों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जिससे सदन में कोई महत्वपूर्ण कार्य नहीं हो सका। अंतत दोनों सदनों की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। यह मानसून सत्र का दूसरा दिन था और लगातार दूसरे दिन संसद की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई।
सरकार जहां अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहती थी, वहीं विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। ऐसे में मानसून सत्र के आगामी दिनों में भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी टकराव की स्थिति बने रहने के संकेत हैं।





