नई दिल्ली। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन 'जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश' (जेबीएम) की एक शाखा की ओर से रची गई आतंकी साजिश के सिलसिले में 11 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं।
इस साजिश का मकसद पश्चिम बंगाल और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (असम और त्रिपुरा सहित) में इस आतंकी संगठन की विचारधारा का विस्तार करना था। इस साजिश में संगठन के चरमपंथी एजेंडे को बढ़ावा देना, आसानी से प्रभावित होने वाले युवाओं को कट्टरपंथी बनाना और भारत में संगठन के नेटवर्क का विस्तार करना शामिल था।
आतंकवाद-रोधी एजेंसी की जांच से पता चला कि जेबीएम के इमाम महमूद हबीबुल्लाह की ओर से देश में प्रतिबंधित संगठन के नापाक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए आईएमके की स्थापना की गई थी।
एनआईए की जांच में यह भी पता चला कि चार्जशीट में शामिल 11 आरोपियों ने गुप्त बैठकों, धार्मिक कट्टरपंथ सिखाने वाले कार्यक्रमों, चरमपंथी साहित्य के प्रसार और भारत-विरोधी प्रचार के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके भारत में आईएमके/जेबीएम की मौजूदगी बढ़ाने की साजिश रची थी।
चार्जशीट में शामिल मुख्य आरोपियों में से दो की पहचान हो गई है। असम में आईएमके की गतिविधियों का नेतृत्व करने वाले नसीमउद्दीन और त्रिपुरा में संगठन का नेतृत्व कर रहे जागीर मिया की पहचान कर ली गई है।
जांच के दौरान, एनआईए को कई आपत्तिजनक दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल रिकॉर्ड मिले, जिनका इस्तेमाल आरोपियों के खिलाफ केस तैयार करने में किया गया।





