आरईसी के पीएफसी में विलय की योजना को दोनों कंपनियों के निदेशक मंडल की मंजूरी
नई दिल्ली, 29 जून (हि.स)। सार्वजनिक क्षेत्र की पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएफसी) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (आरईसी) लिमिटेड के निदेशक मंडलों ने आरईसी के पीएफसी में विलय की योजना को मंजूरी दे दी है। आरईसी का पीएफसी में विलय होने से एक ऐसी वित्तीय कंपनी बनेगी, जिसका कुल कर्ज खाता 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक का होगा।
शेयर बाजार को देर रात दोनों कंपनियों ने इस विलय की जानकारी दी। सोमवार को कारोबार के दौरान दिन में करीब आरईसी के शेयर 0.37 फीसदी यानी 1.35 रुपये चढ़कर 366 रुपये प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहे थे, जबकि पीएफसी के शेयर 1.56 फीसदी यानी कि करीब 6.75 रुपये टूटकर 425.90 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार कर रहे थे। आरईसी के पीएफसी में विलय कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 230-232 और अन्य लागू प्रावधानों के तहत किया जाएगा, जिसमें संबंधित शेयरधारकों तथा कर्जदाताओं को भी शामिल किया गया है। ये विलय कई शर्तों पर निर्भर है।
इनमें दोनों कंपनियों के शेयरधारकों और कर्जदाताओं की मंजूरी और सभी संबंधित नियामकीय तथा सरकारी प्राधिकरणों की मंजूरी शामिल है।
दोनों कंपनियों के संयुक्त बयान के अनुसार विलय के बाद बनी कंपनी का कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत ‘सरकारी कंपनी’ का दर्जा बनाए रखना और भारत सरकार का विलय के बाद बनी कंपनी में (सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से) ज्यादातर मतदान अधिकार और नियंत्रण बनाए रखना भी जरूरी है।
योजना और मूल्यांकन रिपोर्ट के मुताबिक आरईसी का पीएफसी में प्रस्तावित विलय के लिए शेयर विनिमय अनुपात के तहत आरईसी के शेयरधारकों को 10-10 रुपये अंकित मूल्य वाले प्रत्येक चुकता 100 शेयर के बदले पीएफसी के 10-10 रुपये अंकित मूल्य के 88 चुकता शेयर जारी किए जाएंगे। ये शेयर उन शेयरधारकों को जारी किए जाएंगे जिनके पास पीएफसी और आरईसी के निदेशक मंडलों द्वारा तय की जाने वाली रिकॉर्ड तारीख पर कंपनी के शेयर होंगे।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकारी बिजली वित्त कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उनके कामकाज का दायरा व्यापक करने के लिए उन्हें पुनर्गठित करने की योजना की घोषणा की थी।





