जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की निगरानी का मामला हाई कोर्ट पहुंचा
नई दिल्ली। जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष ने जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से जारी प्रदर्शन में जुटे प्रदर्शनकारियों का लगातार पुलिस कैमरे से निगरानी के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। वकील सुभाष चंद्रन और अनिरुद्ध केपी के जरिये ये याचिका दायर की गई है।
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर पर बैठे प्रदर्शनकारियों पर स्थायी सर्विलांस कैमरे से लगातार नजर रखी जा रही है। यहां तक कि महिलाओं और लड़कियों के रात में सोने के दौरान भी कैमरे से नजर रखी जा रही है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर कैमरे से लगातार नजर रखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
याचिका में कहा गया है कि आइशी घोष 20 जून से लगातार प्रदर्शन में हिस्सा ले रही हैं। याचिका में कहा गया है कि कैमरे से प्रदर्शनकारियों के खाने और आराम करने के समय का भी वीडियो फिल्माया जा रहा है। दिल्ली पुलिस कुछ छात्र प्रदर्शनकारियों को यहां तक धमकी दे रहे हैं कि उनका फोटो और वीडियो उनके अभिभावकों और उन संस्थानों को भेज देंगे जहां से वो पढ़ाई कर रहे हैं। इसकी वजह से कई लोग प्रदर्शन में हिस्सा लेने से कतरा रहे हैं।
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने महिला प्रदर्शनकारियों के वीडियो उस हालत में भी बनाए जब भारी बारिश के दौरान वे भींगी हुई थीं और जंतर-मंतर पर छिपने की कोई जगह नहीं थी। ऐसा करना शारीरिक निजता और गरिमा का घोर उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस से बार-बार ये पूछा गया कि लगातार नजर रखने का अधिकार किसने दिया या किस कानूनी प्रावधान से वे ऐसा कर रहे हैं, तो उसका कोई जवाब नहीं दिया गया। याचिका में निजता के अधिकार पर जस्टिस केएस पुट्टास्वामी के उच्चतम न्यायालय के फैसले का जिक्र किया गया है। याचिका में कहा गया है कि ऐसा कर दिल्ली पुलिस संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन कर रही है।





