BREAKING NEWS

logo

न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन का नाम बदलकर ‘न्यू सिलीगुड़ी’ करने की मांग तेज


सिलीगुड़ी। न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘न्यू सिलीगुड़ी रेलवे स्टेशन’ करने की मांग जोर पकड़ रही है।

दरअसल न्यू चेंगराबांधा स्टेशन के पास चेंगराबांधा नाम का जनपद है, न्यू मयनागुड़ी स्टेशन के आसपास मयनागुड़ी बसा है। लेकिन न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन, जिसके नाम में जलपाईगुड़ी शामिल है वह असल में जलपाईगुड़ी शहर से करीब 40–45 किलोमीटर दूर स्थित है। हैरानी की बात यह है कि यह स्टेशन सिलीगुड़ी शहर के वार्ड नंबर 35 के भीतर आता है, फिर भी उसके नाम में सिलीगुड़ी का कोई उल्लेख नहीं है। इसी वजह से सिलीगुड़ी वासियों के बीच स्टेशन का नाम बदलने की मांग उठाया है।

उत्तर-पूर्व भारत की ‘अघोषित राजधानी’ माने जाने वाले सिलीगुड़ी का प्रमुख रेलवे स्टेशन पड़ोसी जिले का नाम से जाना जाता है। इससे पर्यटकों में भ्रम की स्थिति बनती है और शहर की ब्रांड वैल्यू भी प्रभावित होती है।

प्रशासनिक रूप से स्टेशन जलपाईगुड़ी जिले में रहा हो सकता है, लेकिन सामाजिक-आर्थिक रूप से यह सिलीगुड़ी का अभिन्न हिस्सा है, शहर के बुद्धिजीवियों का ऐसा मानना है।

शहरवासियों का तर्क है कि जब उत्तर प्रदेश के मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलकर दीनदयाल उपाध्याय किया जा सकता है, तो न्यू जलपाईगुड़ी का नाम बदलकर न्यू सिलीगुड़ी भी किया जा सकता है।

सिलीगुड़ी के कथाकार बिपुल दास इस मांग से पूरी तरह सहमत हैं। उनका कहना है, शुरू से ही मैं इस नामकरण के खिलाफ रहा हूं। स्टेशन सिलीगुड़ी से महज पांच किलोमीटर के भीतर है, जबकि जलपाईगुड़ी शहर इससे करीब 45 किलोमीटर दूर है। नाम की वजह से लोगों में भ्रम होता है।

दार्जिलिंग, सिक्किम और डुआर्स जाने वाले पर्यटकों के लिए यह स्टेशन मुख्य प्रवेश द्वार है। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले पर्यटक टिकट पर ‘न्यू जलपाईगुड़ी’ देखकर अक्सर समझते हैं कि सिलीगुड़ी यहां से काफी दूर है।

सिलीगुड़ी कॉलेज के प्रोफेसर अमिताभ कंजीलाल का कहना है, भौगोलिक रूप से स्टेशन अब सिलीगुड़ी शहर के भीतर आता है। पहले यह जलपाईगुड़ी के विस्तारित क्षेत्र में था, इसलिए नाम न्यू जलपाईगुड़ी रखा गया था। लेकिन अब यह सिलीगुड़ी नगर निगम क्षेत्र में है, ऐसे में ‘न्यू सिलीगुड़ी’ नाम से किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

गौरतलब है कि 1994 से पहले तक न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन जलपाईगुड़ी के विस्तारित क्षेत्र में आता था। उसी साल सिलीगुड़ी नगर निगम का विस्तार हुआ और जलपाईगुड़ी जिले के कुछ इलाकों को मिलाकर 14 नए वार्ड बनाए गए। तब से एनजेपी स्टेशन नगर निगम के वार्ड नंबर 35 के अंतर्गत है।

सवाल यह भी है कि अगर नाम बदला गया तो क्या जलपाईगुड़ी इसे स्वीकार करेगा? साहित्यकार गौरीशंकर भट्टाचार्य का मानना है, न्यू जलपाईगुड़ी नाम से जलपाईगुड़ी के लोगों की भावनाएं जुड़ी है। नाम बदलने से सिलीगुड़ी और जलपाईगुड़ी के बीच खींचतान बढ़ सकती है, एक तरह का तनाव पैदा हो सकता है। इसलिए नाम न बदले तो भी कोई बड़ा नुकसान नहीं है। फिलहाल, स्टेशन के नाम को लेकर बहस जारी है और यह देखना बाकी है कि केंद्र और रेलवे प्रशासन इस मांग पर क्या रुख अपनाते है।

Subscribe Now